Mamta Kulkarni का बड़ा धमाका: महामंडलेश्वर पद से दिया इस्तीफा; बोलीं- 'जल्द उतार दूँगी भगवा वस्त्र'
पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। 27 जनवरी 2026 को दिए अपने त्याग पत्र में उन्होंने 'श्री यमाई ममता नंद गिरि' के पद को छोड़ने और भगवा वस्त्र उतारने का एलान किया। जानें जे. कृष्णमूर्ति के दर्शन, गुरु चैतन्य गगनगिरि के आदर्श और उनकी 25 साल की आध्यात्मिक यात्रा के पीछे की असली वजह।

Kinnar Akhada Mahamandaleshwar : नब्बे के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री और पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान आध्यात्मिक चर्चा का केंद्र बनीं ममता कुलकर्णी ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। 'श्री यमाई ममता नंद गिरि' के नाम से संन्यास जीवन जी रही ममता ने 27 जनवरी 2026 को किन्नर अखाड़ा के प्रतिष्ठित 'महामंडलेश्वर' पद से त्यागपत्र दे दिया है। ग्लैमर से संन्यास और अब पद का यह परित्याग, ममता के जीवन के एक और बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत दे रहा है।
इस्तीफे का आधार: सत्य को वस्त्रों की आवश्यकता नहीं
ममता कुलकर्णी ने अपने आधिकारिक त्याग पत्र में स्पष्ट किया है कि वह पूरी तरह से संतुलित मानसिक स्थिति में यह निर्णय ले रही हैं। उन्होंने अपने पत्र में गहन आध्यात्मिक दर्शन का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उनका ज्ञान अब प्रसिद्ध दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति की तरह स्वतंत्र रूप से बहेगा।
ममता के इस निर्णय के पीछे के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
निराकार सत्य की खोज: उन्होंने पत्र में लिखा, "सत्य को न तो किसी विशेष वस्त्र की आवश्यकता है और न ही किसी प्रतिमा की।"
गुरु का आदर्श: ममता ने अपने गुरु श्री चैतन्य गगनगिरि नाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी कभी कोई औपचारिक पद स्वीकार नहीं किया था, अतः वे भी उसी मार्ग पर चलेंगी।
भगवा वस्त्र पर बेबाक बयान: इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले दिए इंटरव्यू में उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि भगवा पहनना किसी राजनीतिक पार्टी (BJP) का एजेंट होना नहीं है और वे जल्द ही इन वस्त्रों को उतार देंगी।
अखाड़े के साथ संबंध और भविष्य की योजना :
इस्तीफे के बावजूद ममता ने किन्नर अखाड़ा की प्रमुख डॉ. आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़े से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और उन्हें जो प्यार मिला, उसके लिए वे कृतज्ञ हैं।
अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा:
25 साल की साधना: ममता पिछले ढाई दशकों से अंतर्मुखी रहकर आध्यात्मिक अभ्यास कर रही हैं और इसे आगे भी जारी रखेंगी।
स्वतंत्र ज्ञान प्रसार: वे किसी विशिष्ट समूह या पार्टी से बंधने के बजाय, समान विचारधारा वाले लोगों के साथ अपना ज्ञान साझा करेंगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
