हर वर्ष जैन धर्मावलंबियों के लिए मार्गदर्शन और आस्था का प्रतीक बनकर आने वाली परश्वनाथ जयंती इस बार विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर, भगवान परश्वनाथ, के जन्मोत्सव के रूप में विख्यात है, जिनका जीवन सत्य, अहिंसा और आत्मसाक्षात्कार के संदेशों से भरा हुआ था। भगवान परश्वनाथ का जन्म लगभग 2,700 साल पूर्व वृषभनगर (वर्तमान राजस्थान के कण) में हुआ था। वे जैन धर्म में भगवान महावीर से पहले के तीर्थंकर थे और उनके उपदेशों ने अहिंसा, संयम और आध्यात्मिक साधना के मार्ग को और अधिक सुदृढ़ किया। उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य जीवों के प्रति करुणा और मानसिक शांति का संदेश देना था।

परश्वनाथ जयंती प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस अवसर पर जैन समुदाय के लोग सुबह-सुबह मंदिरों में एकत्र होकर विशेष पूजन और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं। मुख्य समारोहों में भगवान परश्वनाथ की मूर्तियों की श्रृंगार और उन्हें फूलों तथा दीपों से सजाया जाता है। इसके साथ ही, जैन अनुयायी उपवास, धर्मोपदेश श्रवण और धार्मिक प्रवचन में भाग लेकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं।

विविध जैन मंदिरों में इस अवसर पर शुद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान परश्वनाथ के जीवन से जुड़े धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं और उनके उपदेशों को अपने दैनिक जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं। इस पर्व की सामाजिक और आध्यात्मिक महत्ता इसलिए भी है क्योंकि यह अहिंसा, करुणा और सत्य के आदर्शों को युवाओं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।

सरकारी और स्थानीय प्रशासन भी बड़े पैमाने पर इस पर्व की शांति और सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हैं। मंदिरों और श्रद्धालु संगठनों के साथ मिलकर विशेष सुरक्षा प्रबंध, यातायात नियंत्रण और सार्वजनिक सुविधा व्यवस्था की जाती है, ताकि श्रद्धालु सहजता से पूजा-अर्चना कर सकें।

परश्वनाथ जयंती न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का अवसर भी प्रदान करती है। इस दिन की मान्यता, भव्य धार्मिक आयोजन और समाज में व्याप्त करुणा की भावना इसे जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व बनाती है। परश्वनाथ जयंती न केवल भगवान परश्वनाथ के जन्म और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि यह मानवता, अहिंसा और धर्मनिष्ठा के संदेश को जीवंत बनाए रखने का अवसर भी प्रदान करती है। हर वर्ष यह पर्व श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की अनुभूति कराता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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