हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में से एक कूर्म अवतार की स्मृति में मनाई जाने वाली कूर्म जयंती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का पर्व माना जाता है। यह दिवस भगवान विष्णु के उस दिव्य अवतार को समर्पित है, जिसमें उन्होंने सृष्टि के कल्याण और देवताओं की रक्षा के लिए कच्छप अर्थात कछुए का रूप धारण किया था। कूर्म जयंती विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाती है, तथा इस अवसर पर देशभर के विष्णु मंदिरों में विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कूर्म अवतार भगवान विष्णु का दूसरा अवतार माना जाता है, जबकि कुछ ग्रंथों में इसे ग्यारहवां अवतार भी बताया गया है। यह अवतार सतयुग के दौरान उस समय प्रकट हुआ जब देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन की योजना बनी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु को नारायण, श्रीहरि, जनार्दन और अच्युत जैसे अनेक नामों से जाना जाता है, और वे सृष्टि के संकटों से रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतरित होते हैं।

समुद्र मंथन के दौरान जब मंदराचल पर्वत को मथानी के रूप में प्रयोग किया गया, तो वह विशाल पर्वत समुद्र में डूबने लगा, जिससे मंथन की प्रक्रिया बाधित होने लगी। ऐसी स्थिति में देवताओं ने भगवान विष्णु की आराधना की। देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया और अपने विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को स्थिर कर दिया, जिससे समुद्र मंथन की प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सकी। इसी दिव्य घटना के कारण भगवान विष्णु का यह अवतार कूर्म अवतार या कच्छपावतार के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

पौराणिक विवरणों के अनुसार, शुकाचार्य द्वारा दानवों को संजीवनी विद्या प्राप्त होने के बाद असुरों की शक्ति अत्यधिक बढ़ गई थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने देवलोक पर अधिकार कर लिया था। स्थिति गंभीर होने पर देवताओं ने भगवान विष्णु की शरण ली, जिसके बाद समुद्र मंथन की योजना बनी और अमृत प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह घटना केवल एक पौराणिक कथा ही नहीं बल्कि धर्म और अधर्म के संघर्ष में संतुलन स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण कथा के रूप में भी देखी जाती है।

कूर्म जयंती का शुभ मुहूर्त 04:03 बजे अपराह्न से 06:32 बजे अपराह्न तक निर्धारित किया गया है, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 29 मिनट की है। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 अप्रैल 2026 को रात्रि 09:12 बजे होगा, जबकि इसका समापन 01 मई 2026 को रात्रि 10:52 बजे होगा। इन्हीं तिथियों के मध्य कूर्म जयंती का धार्मिक महत्व और पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

धार्मिक ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत, नारसिंह पुराण, शतपथ ब्राह्मण, महाभारत, लिंग पुराण और कूर्म पुराण में कूर्म अवतार का विस्तृत उल्लेख मिलता है। यह अवतार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संकट की घड़ी में दैवीय शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए स्वयं प्रकट होती है।

कूर्म अवतार की प्रतिमा स्वरूप में भगवान विष्णु को चार भुजाओं के साथ दर्शाया जाता है, जिनमें शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए होते हैं। उनका आधा शरीर कछुए के रूप में और ऊपरी भाग मानव स्वरूप में दर्शाया जाता है, जो सृष्टि में संतुलन और संरक्षण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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