हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल परशुराम द्वादशी के पंद्रह दिन बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की द्वादशी को कृष्ण परशुराम द्वादशी के रूप में जाना जाता है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले परशुराम जी की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान परशुराम की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे धर्म, शक्ति तथा जीवन में समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

वर्ष 2026 में कृष्ण परशुराम द्वादशी का पर्व बुधवार, 13 मई को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इसी दिन दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर द्वादशी तिथि का आरंभ होगा, जो अगले दिन 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के पारण का समय 14 मई को सुबह 06 बजकर 04 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट तक निर्धारित किया गया है। विशेष बात यह है कि पारण दिवस पर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी, जिसे व्रत-समापन के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में द्वादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। विद्वानों और संतों के अनुसार यह व्रत एकादशी व्रत के समान ही पुण्यदायी और प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा अंत समय में उसे भगवान विष्णु के दिव्य धाम विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

कृष्ण परशुराम द्वादशी के व्रत की विधि और नियम वैशाख शुक्ल द्वादशी पर मनाए जाने वाले परशुराम द्वादशी व्रत के समान ही होते हैं। भक्त इस दिन संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु के परशुराम स्वरूप की पूजा करते हैं और धर्ममार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह तिथि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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