कोलकाता में लगभग 50 साल बाद पहली बार ईद-उल-अजहा की नमाज़ रेड रोड की बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई, जबकि रेड रोड ट्रैफिक के लिए खुला रहा। प्रशासन के इस फैसले ने धार्मिक आयोजनों, सार्वजनिक सड़कों और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर देशभर में नई बहस छेड़ दी।

कोलकाता ने इस बार ईद-उल-अजहा पर एक ऐसा दृश्य देखा, जिसने शहर की दशकों पुरानी परंपरा को बदल दिया। लगभग पांच दशक बाद पहली बार ऐसा हुआ जब कोलकाता का ऐतिहासिक और व्यस्त रेड रोड ईद की नमाज़ के दौरान पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खुला रहा। वर्षों से जिस सड़क पर लाखों लोग एकत्र होकर ईद की नमाज़ अदा करते आए थे, इस बार वही नमाज़ पास स्थित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई। इस फैसले ने केवल शहर की यातायात व्यवस्था ही नहीं बदली, बल्कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी।

कोलकाता के मैदान क्षेत्र के पास स्थित रेड रोड लंबे समय से पूर्वी भारत के सबसे बड़े ईद जमावड़ों में शामिल रहा है। 1970 के दशक से यहां ईद की नमाज़ के दौरान सड़क को कई घंटों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाता था। लाखों नमाज़ियों की मौजूदगी के कारण पूरे सेंट्रल कोलकाता में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए जाते थे और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह अलग रही।



ईद की नमाज़ पहली बार रेड रोड की बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि रेड रोड पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहे। कोलकाता पुलिस ने नमाज़ियों की भीड़ को अलग मार्गों से नियंत्रित किया और सार्वजनिक यातायात को प्रभावित होने से बचाने के लिए विशेष प्रबंधन किए। अधिकारियों का मुख्य फोकस बड़े पैमाने पर सड़क अवरोध रोकना और शहर की यातायात व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना था।



सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे प्रशासन की नई नीति और दिशा-निर्देश अहम कारण रहे। हाल के निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि धार्मिक आयोजनों के लिए सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए, लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित सीमा के भीतर रहनी चाहिए और शहर के प्रमुख यातायात मार्गों को हर हाल में चालू रखा जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन और आयोजकों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। अंततः ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नमाज़ के लिए अंतिम रूप दिया गया। चूंकि मैदान क्षेत्र का बड़ा हिस्सा सेना के नियंत्रण में आता है, इसलिए आयोजन के लिए सेना से विशेष अनुमति भी ली गई।



इस बार केवल रेड रोड ही नहीं, बल्कि कोलकाता के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले राजा बाजार इलाके में भी सड़क पर नमाज़ की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके और सार्वजनिक जीवन भी प्रभावित न हो।

इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। तृणमूल कांग्रेस नेता जावेद अहमद खान ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित नमाज़ को लेकर कहा कि वह सरकार का धन्यवाद करते हैं कि नमाज़ पर रोक लगाने के बजाय वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराया गया। उनके बयान को प्रशासन और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधा की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे कोलकाता की ऐतिहासिक परंपरा में बदलाव के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर मुंबई का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बांद्रा स्टेशन के बाहर सड़क पर नमाज़ अदा करते लोग दिखाई दिए।



वीडियो साझा करते हुए कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर पश्चिम बंगाल में सड़क पर नमाज़ की व्यवस्था बदली जा सकती है, तो अन्य राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। कई पोस्टों में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का भी उल्लेख किया गया और तुलना करते हुए अन्य राज्यों की सरकारों पर सवाल खड़े किए गए।

हालांकि प्रशासन की ओर से पूरे मामले को कानून व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधा से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से बढ़ते शहरी दबाव के बीच धार्मिक आयोजनों के लिए निर्धारित मैदानों और वैकल्पिक स्थलों के उपयोग को बढ़ावा देना आने वाले समय में कई शहरों की प्राथमिकता बन सकता है।

कोलकाता में इस बार की ईद केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह शहर की बदलती प्रशासनिक सोच, सार्वजनिक व्यवस्थाओं और परंपराओं के बीच नए संतुलन का प्रतीक बन गई। रेड रोड का खुला रहना आने वाले वर्षों में देशभर में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर नई नीतियों और बहसों का आधार बन सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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