हिमालय की गोद में विराजमान ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही बुधवार को उत्तराखंड की पवित्र चार धाम यात्रा अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई। सुबह ठीक आठ बजे जब पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, तब केदार घाटी महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल 'हर हर महादेव' का उद्घोष कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि देशवासियों के नाम एक विस्तृत पत्र लिखकर अपनी भावनाओं को साझा किया। प्रधानमंत्री ने चार धाम यात्रा को भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव करार देते हुए इसे राष्ट्र की एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य संगम बताया।

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र के माध्यम से श्रद्धालुओं के बीच एक नई चेतना जागृत करने का प्रयास किया है। उन्होंने जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं ने ही भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा प्रदान की थी। विकसित भारत के संकल्प में उत्तराखंड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने दोहराया कि यह दशक वास्तव में उत्तराखंड का दशक है, जहां आध्यात्मिकता के साथ-साथ आर्थिक प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने तीर्थयात्रियों से 'डिजिटल उपवास' का अनोखा अनुरोध किया, ताकि लोग तकनीक के शोर से दूर होकर प्रकृति की दिव्यता और शांति का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें।

इस वर्ष की यात्रा को अधिक सार्थक बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच विशेष संकल्प लेने का आग्रह किया है। पहले संकल्प के रूप में उन्होंने 'स्वच्छता' को सर्वोपरि रखने की बात कही, जिसमें सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्ति और पवित्र नदियों को स्वच्छ रखना शामिल है। दूसरा संकल्प प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का है, जिसके तहत उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को गति देने की अपील की। तीसरे संकल्प में उन्होंने सेवा और सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक यात्री अपनी यात्रा के दौरान किसी न किसी रूप में दूसरों की सहायता अवश्य करे। चौथा संकल्प आर्थिक स्वावलंबन से जुड़ा है, जिसमें 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देते हुए यात्रियों से अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च करने का आग्रह किया गया। अंत में, उन्होंने अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा के पालन को पांचवां संकल्प बताया।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स से भी विशेष अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और छोटी-छोटी परंपराओं को विश्व पटल पर लाने का प्रयास करें। केदारनाथ धाम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हुई इस विशेष पूजा ने यह सुनिश्चित किया कि शासन और प्रशासन श्रद्धालुओं की सुगम और सुरक्षित यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बाबा केदार का यह आशीर्वाद और प्रधानमंत्री के ये संकल्प न केवल इस यात्रा को एक आध्यात्मिक अनुभव बनाएंगे, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति नागरिकों के दायित्वों को भी सुदृढ़ करेंगे। आगामी दिनों में बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही यह सांस्कृतिक महाकुंभ अपनी पूर्ण भव्यता को प्राप्त करेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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