उखीमठ से बाबा केदार की पंचमुखी डोली हुई रवाना; हिमालयी तीर्थयात्रा का भव्य आगाज़
केदारनाथ धाम की डोली यात्रा उखीमठ से शुरू। 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे कपाट। हजारों भक्तों और सेना के बैंड के साथ बाबा केदार की पालकी हिमालय रवाना।

उखीमठ में पारंपरिक रीति-रिवाजों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में प्रस्थान करती भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली।
Kedarnath Doli Yatra Omkareshwar Temple : देवभूमि उत्तराखंड की पहाड़ियाँ एक बार फिर भगवान शिव के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठी हैं। रविवार को उखीमठ स्थित ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की पारंपरिक पंचमुखी डोली को पूरे विधि-विधान के साथ रवाना किया गया, जो इस वर्ष की हिमालयी तीर्थयात्रा के औपचारिक प्रारंभ का प्रतीक है। अपने शीतकालीन निवास से ग्रीष्मकालीन धाम की ओर प्रस्थान करते महादेव की इस एक झलक को पाने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। मंदिर परिसर को लगभग 8 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से किसी नववधू की तरह सजाया गया था, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्य और आध्यात्मिक आभा से सराबोर हो गया।
डोली प्रस्थान का यह दृश्य सैन्य परंपरा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स के बैंड ने जब अपनी औपचारिक धुनों के साथ जुलूस की कमान संभाली, तो भक्तों का उत्साह चरम पर पहुँच गया। सदियों पुरानी इस परंपरा को निभाते हुए पुजारी वर्ग और स्थानीय प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि भगवान की पंचमुखी प्रतिमा का प्रस्थान पूरी गरिमा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हो। इस दौरान जगह-जगह सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन किया गया, जहाँ भक्तों ने सेवा और भक्ति के भाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन भर के पुण्य संचय का एक दुर्लभ अवसर है, जहाँ युवा और वृद्ध समान रूप से दुर्गम रास्तों पर बाबा की पालकी के साथ चलने को आतुर दिखे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, भगवान की डोली अपनी पदयात्रा के दौरान प्रथम रात्रि फाटा में विश्राम करेगी। इसके उपरांत सोमवार को यह पवित्र यात्रा गौरीकुंड पहुँचेगी, जहाँ श्रद्धालु बाबा का स्वागत करेंगे। 21 अप्रैल को डोली केदारनाथ धाम के आँगन में प्रवेश करेगी, जहाँ प्रतिमा को मुख्य मंदिर के गर्भगृह में पूर्ण श्रद्धा के साथ स्थापित किया जाएगा। इस पूरी यात्रा का मुख्य आकर्षण 22 अप्रैल का दिन होगा, जब सुबह ठीक 8 बजे वैदिक मंत्रों और शंखनाद के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकालीन दर्शनों के लिए खोल दिए जाएंगे।
इस यात्रा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी है। एक ओर जहाँ 67 वर्षीय अनुभवी श्रद्धालु अपनी पाँचवीं यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए भावुक नज़र आए, वहीं पहली बार शामिल हो रहे युवा भक्तों के लिए यह हिमालय की दुर्गम चोटियों पर ईश्वरीय साक्षात का माध्यम बन गया है। प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि सुदूर हिमालयी क्षेत्रों में भक्तों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू हो जाएगी, जो भारतीय पर्यटन और आस्था के मानचित्र पर एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
