कराडैयन नोंबु 2026: क्या है कराडैयन नोंबु का शुभ समय? जानिए मंजल सराडु बांधने का सही मुहूर्त और विधि
कराडैयन नोंबु 2026 15 मार्च को मनाया जाएगा, सावित्री की भक्ति और पति की लंबी उम्र के लिए उपवास और पूजा का प्रमुख पर्व। विवाहित महिलाएं मंजल सराडु बांधकर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं उत्तम जीवनसाथी की कामना करती हैं।

कराडैयन नोंबु 2026
तमिल कैलेंडर के अनुसार, कराडैयन नोंबु 2026 का पर्व 15 मार्च को मनाया जाएगा, जब मासि माह समाप्त होकर पंगुनी माह प्रारंभ होता है। यह त्योहार विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा उनके पतियों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए उपवास और प्रार्थना करने के लिए मनाया जाता है। वहीं, अविवाहित महिलाएं और युवा कन्याएं भविष्य में उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं एक पवित्र पीले धागे (मंजल सराडु) को बांधकर देवी गोवरी या कमाक्षी की पूजा करती हैं।
उत्पत्ति और महत्व:
कराडैयन नोंबु की उत्पत्ति महाभारत के प्राचीन महाकाव्य से जुड़ी है। यह त्योहार सावित्री की अद्भुत भक्ति और संकल्प को समर्पित है, जिन्होंने अपने पति सत्यवान को मृत्यु के देवता यमराज से बचाने के लिए अद्वितीय साहस और बुद्धिमत्ता दिखाई। कथा के अनुसार, सत्यवान का जीवन छोटा होने का भविष्यवाणी थी। सावित्री ने यह जानते हुए भी सत्यवान से विवाह किया।
पर्व की विशेषताएँ और अनुष्ठान:
- उपवास और पूजा: महिलाएं सूर्योदय से उपवास रखती हैं और विशेष पूजा करती हैं।
- कराडई अड़ई का प्रसाद: यह त्योहार मीठे और नमकीन चावल केक से जुड़ा है, जिनमें करमानी (काबुली चना) मिलाया जाता है।
- मंजल सराडु बांधना: विवाहित महिलाएं इस पवित्र पीले धागे को बांधकर अपने पतियों की लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
- सटीक समय: मुख्य अनुष्ठान और धागा बांधने का मुहूर्त मासि और पंगुनी के संक्रमण के समय, अक्सर सुबह या दोपहर के बीच होता है।
व्रत और मुहूर्त का विवरण:
- व्रत प्रारंभ: 14 मार्च 2026, सुबह 06:32 बजे
- व्रत समाप्ति: 15 मार्च 2026, रात 01:08 बजे
- मंजल सराडु बांधने का मुहूर्त: 15 मार्च 2026, रात 01:08 बजे
कौन मनाता है कराडैयन नोंबु?
यह पर्व मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इसके साथ ही, अविवाहित महिलाएं और कन्याएं भी इसमें भाग लेकर अपने लिए उत्तम जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं। यह पर्व पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले संस्कारों और परंपराओं का भी प्रतीक है, जहां माताएं अपनी बेटियों को रीति-रिवाज सिखाती हैं।
पारंपरिक प्रार्थना:
इस दिन महिलाएं प्रार्थना करती हैं:
"उरुगाडा वेन्नैयुम ओराडईयुम नान थारुवेन, ओरुकालुम एन कानावर என்னै पिरियादिरुक्कणुम"
(मैं नरम मक्खन और पवित्र अड़ई अर्पित करती हूँ, प्रार्थना करती हूँ कि मेरा पति मुझे कभी न छोड़े।)
कराडैयन नोंबु केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पत्नी और पति के बीच अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है। सावित्री की भक्ति और साहस की कहानी इस पर्व को भावपूर्ण और प्रेरणादायक बनाती है। इस दिन का महत्व सिर्फ उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मविश्वास, धैर्य और परिवारिक बंधन को भी मजबूत करता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
