Kaal Bhairav Ashtakam benefits for destroying obstacles : सनातन धर्म में तंत्र-मंत्र और बाधा निवारण के अधिष्ठाता देव भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने का महापर्व 'कालाष्टमी' इस वर्ष 10 जनवरी, शनिवार को अत्यंत शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। माघ मास की इस पावन अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र और कल्याणकारी रूप काल भैरव के अवतरण और उनकी विशेष उपासना के लिए समर्पित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव न केवल समय (काल) के संचालक हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के जीवन से भय, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु जनित बाधाओं का समूल नाश करने वाले रक्षक भी हैं। इस विशेष अवसर पर साधक अपने रुके हुए कार्यों की सिद्धि और मानसिक शांति के लिए व्रत अनुष्ठान के साथ-साथ विशेष मंत्र साधना का आश्रय लेते हैं।

वैदिक पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, इस दिन की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि काल भैरव की पूजा से कुंडली के क्रूर ग्रहों, विशेषकर शनि और राहु के दुष्प्रभावों को शांत किया जा सकता है। शास्त्रोक्त विधान है कि काल भैरव देव की आराधना से साधक के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के कष्ट, दुख और अदृश्य संकट दूर हो जाते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन स्वयं के भीतर के भय पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के विभिन्न ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों में काल भैरव का विशेष श्रृंगार और अभिषेक किया जाता है, जहाँ श्रद्धालु 'ॐ नमो भैरवाय स्वाहा' और 'ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय शत्रु नाशं कुरु' जैसे शक्तिशाली बीज मंत्रों का जप कर अपनी मनोकामनाएं निवेदित करते हैं।

विशेष रूप से, कालाष्टमी की रात्रि को की जाने वाली 'भैरव स्तुति' का महत्व सर्वाधिक बताया गया है। इसमें वर्णित बीजाक्षरों—जैसे यं, सं, दं और पं—का उच्चारण वातावरण में एक विशेष ऊर्जा का संचार करता है, जो तंत्र बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों को निष्प्रभावी करने में सक्षम माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इस पावन तिथि पर महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ भी भक्तों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्त कर दीर्घायु और आरोग्य प्रदान करता है। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि जो व्यक्ति निरंतर छह माह तक इन स्तुतियों का पाठ करता है, वह समस्त भौतिक सुखों को प्राप्त कर अंततः परम पद का अधिकारी बनता है।

कालाष्टमी का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति के जागरण का उत्सव है। वाराणसी से लेकर उज्जैन तक, काल भैरव के मंदिरों में होने वाली महाआरती और दीपदान इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि आधुनिक युग में भी पुरातन मंत्रों की शक्ति और देव उपासना के प्रति जनमानस की श्रद्धा अक्षुण्ण है। यह पर्व हमें यह सीख देता है कि धर्म और संयम के मार्ग पर चलते हुए दिव्य मंत्रों के सहारे कठिन से कठिन परिस्थितियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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