आस्था के केंद्र में अधर्म की सेंध: सबरीमाला के मुख्य तंत्री कंदारारू राजीवरू गिरफ्तार, सोने की चोरी के रहस्य से उठा पर्दा
सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में मुख्य तंत्री कंदारारू राजीवरू गिरफ्तार! गर्भगृह और द्वारपाल की मूर्तियों से गायब हुआ सोना। जानें SIT की जांच, भ्रष्टाचार के आरोप और कैसे 2026 की इस बड़ी गिरफ्तारी ने हिला दी भक्तों की आस्था। पूरी कानूनी और प्रशासनिक रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

तिरुवनंतपुरम/सबरीमाला: केरल का सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु अपनी अटूट श्रद्धा के साथ भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुँचते हैं, आज एक दुखद और स्तब्ध कर देने वाले विवाद के केंद्र में है। मंदिर के वरिष्ठ तंत्री (मुख्य पुजारी) कंदारारू राजीवरू को केरल पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर के गर्भगृह और कलाकृतियों से सोने की चोरी और गबन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि एक धार्मिक संस्थान की शुचिता पर लगा वह गहरा दाग है जिसने पूरे देश के हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।
षड्यंत्र का खुलासा: कैसे गायब हुआ भगवान का सोना?
यह पूरा मामला 2019 में मंदिर के गर्भगृह (Sreekovil) के चौखट और 'द्वारपाल' की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने (Gold Replating) के काम से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि इस प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में सोने की हेराफेरी की गई।
- मुख्य आरोप: तंत्री राजीवरू पर आरोप है कि उन्होंने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। उन्होंने मंदिर के नियमों का उल्लंघन करते हुए सोने की परतों को मंदिर परिसर से बाहर ले जाने की "मूक सहमति" दी थी।
- दूसरी गिरफ्तारी: राजीवरू पहले से ही जेल में थे, लेकिन 15 जनवरी 2026 को उन्हें 'द्वारपाल' मूर्तियों से सोना गायब होने के एक दूसरे मामले में फिर से औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
- लापता स्वर्ण: एसआईटी के अनुसार, लगभग 475 ग्राम से अधिक सोना अभी भी लापता है, जिसे कथित तौर पर रासायनिक प्रक्रिया के जरिए अलग कर बेच दिया गया।
विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई
केरल उच्च न्यायालय की कड़ी निगरानी में चल रही इस जांच ने अब तक 12 लोगों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है।
- पब्लिक सर्वेंट का दर्जा: अदालत ने स्पष्ट किया है कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) से मानदेय प्राप्त करने के कारण तंत्री एक 'पब्लिक सर्वेंट' की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धाराएं लागू होंगी।
- बोर्ड के सदस्यों की संलिप्तता: इस मामले में तंत्री के अलावा टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और पूर्व सदस्य के.पी. शंकर दास को भी गिरफ्तार किया गया है, जो इस घोटाले की गहराई को दर्शाता है।
- रिमांड और स्वास्थ्य: गिरफ्तारी के बाद राजीवरू को शारीरिक अस्वस्थता के चलते तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहाँ पुलिस की कड़ी निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
धार्मिक परंपराओं पर प्रभाव
सबरीमाला में 'तंत्री' का पद सर्वोच्च आध्यात्मिक अधिकारी का होता है, जो रीति-रिवाजों का अंतिम निर्णायक होता है। इस गिरफ्तारी के बाद मंदिर की परंपराओं को बनाए रखने के लिए तंत्री परिवार के ही महेश मोहनारू ने मुख्य पुजारी की जिम्मेदारियां संभाली हैं। हालांकि, मकरविलक्कु उत्सव के ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने उत्सव की रौनक पर चिंता और विवादों का साया डाल दिया है।
सुचिता की मांग करता मंदिर प्रशासन
सबरीमाला के मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी भारतीय न्यायिक इतिहास की एक दुर्लभ और गंभीर घटना है। यह स्पष्ट संदेश है कि कानून की नजर में कोई भी पद या व्यक्ति सर्वोच्च नहीं है। करोड़ों भक्तों का दान और भगवान अयप्पा के आभूषणों की सुरक्षा में हुई यह चूक मंदिर प्रबंधन की बड़ी नाकामी को दर्शाती है। इस मामले का अंतिम फैसला न केवल दोषियों को सजा देगा, बल्कि भविष्य में मंदिरों की संपत्ति के संरक्षण और प्रबंधन के लिए नए और कड़े मानदंड स्थापित करेगा। आस्था के इस पावन धाम को अब फिर से उसी विश्वास और पवित्रता को हासिल करने की चुनौती है, जिसे इस घोटाले ने धूमिल कर दिया है।

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