काल गणना की भारतीय वैदिक परंपरा और वैश्विक कैलेंडरों के अद्भुत संगम के बीच देश में हिंदू नव वर्ष 'विक्रम संवत 2083' का शंखनाद हो चुका है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ ही 19 मार्च, 2026 को इस नूतन वर्ष की शुरुआत हुई, जो भारतीय संस्कृति में समय के सूक्ष्म वैज्ञानिक विभाजन को रेखांकित करता है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित विक्रम संवत, जो अंग्रेजी ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष आगे चलता है, वर्तमान में अपने 2083वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जबकि इससे पूर्व 30 मार्च, 2025 को विक्रम संवत 2082 का प्रारंभ हुआ था। इसी के समानांतर भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय कैलेंडर 'शक संवत' में वर्तमान में वर्ष 1947 गतिमान है, जो राष्ट्रीय और प्रशासनिक आयोजनों में समय का मुख्य आधार बना हुआ है।

समय की इस जटिल किंतु सटीक गणना के बीच इस्लामिक कैलेंडर यानी हिजरी संवत 1447 भी अपनी विशिष्ट गति से अग्रसर है। पैगंबर मोहम्मद साहब के मक्का से मदीना प्रवास (हिजरत) की स्मृति में शुरू हुआ यह कैलेंडर पूर्णतः चंद्रमा की कलाओं पर आधारित है। हिजरी संवत 1447 का आगाज़ पिछले वर्ष 26 जून, 2025 को हुआ था और अब आगामी 16 जून, 2026 के आसपास चांद के दीदार के साथ ही हिजरी संवत 1448 की दस्तक होने की संभावना है। खगोलीय दृष्टि से देखें तो हिंदू और इस्लामिक कैलेंडरों के बीच ऋतुओं के तालमेल का बड़ा अंतर विद्यमान है। हिंदू पंचांग में सौर और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे वर्ष 'अधिमास' का प्रावधान है, जिससे होली और दिवाली जैसे पर्व सदैव निश्चित ऋतुओं में ही आते हैं। इसके विपरीत, इस्लामिक कैलेंडर में अतिरिक्त माह की व्यवस्था न होने के कारण इसके त्योहार ग्रेगोरियन कैलेंडर की तुलना में प्रतिवर्ष 10 से 11 दिन पीछे खिसकते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप रमजान और ईद जैसे पर्व हर मौसम के चक्र से गुजरते हैं।

इन दोनों कैलेंडरों के बीच दिन की परिभाषा भी वैचारिक भिन्नता रखती है; जहाँ हिंदू धर्म में दिन का उदय सूर्योदय के साथ माना जाता है, वहीं इस्लाम में सूर्यास्त के तुरंत बाद से ही नए दिन की गणना प्रारंभ हो जाती है। यदि ग्रेगोरियन कैलेंडर से तुलना की जाए तो विक्रम संवत जहाँ 57-58 साल आगे है, वहीं हिजरी संवत अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 578-579 साल पीछे चलता है। महीनों की संख्या दोनों ही पद्धतियों में सामान्यतः 12 होती है, किंतु हिंदू पंचांग में अधिमास के समावेश से कभी-कभी वर्षों में 13 महीने भी देखे जाते हैं। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर विक्रम संवत 2083 का यह प्रारंभ न केवल काल गणना का परिवर्तन है, बल्कि यह भारत की उस समृद्ध विरासत का प्रतीक है जो हज़ारों वर्षों से समय को अध्यात्म और विज्ञान के तराजू पर तौलती आ रही है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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