41 दिनों की तपस्या के बाद 12 मई को हनुमान जयंती का महापर्व; जानें पूजा विधि और तिथि
हनुमान जयंती 2026 का पर्व 12 मई को मनाया जाएगा, जबकि 41 दिवसीय दीक्षा 2 अप्रैल से शुरू होती है। आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में विशेष अनुष्ठान, दशमी तिथि, उपवास, शोडशोपचार पूजा और सिंदूर अर्पण की परंपरा के साथ यह पर्व भक्ति और साधना का प्रतीक माना जाता है।

भगवान हनुमान
हनुमान जयंती हिंदू धर्म में आस्था और भक्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन अवसर मंगलवार, 12 मई को मनाया जाएगा, जबकि इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत 2 अप्रैल 2026 से होगी। इस पर्व को केवल एक दिन का उत्सव नहीं माना जाता, बल्कि इसे 41 दिनों के विशेष साधना काल के रूप में भी देखा जाता है, जिसमें भक्त कठोर नियमों का पालन करते हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इस पर्व की परंपरा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहाँ श्रद्धालु चैत्र पूर्णिमा से 41 दिनों की दीक्षा आरंभ करते हैं और हनुमान जयंती के दिन इसका समापन करते हैं। इस अवधि में भक्त संयम, भक्ति और साधना का पालन करते हुए भगवान हनुमान की आराधना करते हैं। उत्तर भारत में भी हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व अत्यंत व्यापक है, और इसे 2 अप्रैल 2026 को उत्तर हनुमान जयंती के रूप में भी स्मरण किया जाएगा।
दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में हनुमान जयंती की तिथियों में भिन्नता देखी जाती है। तमिल परंपरा के अनुसार हनुमत जयंती 7 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी, जबकि कन्नड़ परंपरा में यह पर्व 22 दिसंबर 2026 को श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह विविधता भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की समृद्धता को दर्शाती है। पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 11 मई 2026 को दोपहर 3:24 बजे से प्रारंभ होकर 12 मई 2026 को दोपहर 2:52 बजे समाप्त होगी। इसी अवधि में हनुमान जयंती का मुख्य पूजन और अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
इस अवसर पर भक्तजन एक दिन का उपवास रखते हैं और शोडशोपचार विधि से भगवान हनुमान की पूजा करते हैं। हनुमान मंदिरों में विशेष दर्शन का आयोजन किया जाता है, जहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन भगवान हनुमान को सिंदूर अर्थात लाल चंदन अर्पित करने की परंपरा भी विशेष रूप से निभाई जाती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है, जो भक्तों को आस्था और शक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है। यह पर्व समाज में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश देता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
