दक्षिण भारत में हनुमान जयंती की तिथि और स्वरूप उत्तर भारत से भिन्न होते हुए भी उतनी ही गहरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाए जाते हैं। वर्ष 2025 में तमिलनाडु और केरल सहित दक्षिण भारतीय राज्यों में हनुमान जयंती शुक्रवार, 19 दिसंबर को मनाई जा रही है। यह पर्व तमिल पंचांग के मार्गशीर्ष (मार्गज़ही) मास की अमावस्या को पड़ता है, जो उत्तर भारत में प्रचलित चैत्र पूर्णिमा से अलग है। तिथि का यह अंतर स्थानीय शास्त्रीय परंपराओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है, जो दक्षिण भारतीय धार्मिक संस्कृति की विशिष्टता को रेखांकित करता है।

इस दिन का धार्मिक महत्व अत्यंत व्यापक माना जाता है। दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या को भगवान हनुमान के अवतरण और उनकी तपस्या, ब्रह्मचर्य तथा अटूट भक्ति का प्रतीक माना जाता है। तमिलनाडु में यह पर्व “अंजनेय जयंती” के रूप में भी जाना जाता है, जबकि केरल में इसे हनुमान की शक्ति और सेवा भाव के स्मरण दिवस के रूप में देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान जी की उपासना करने से साहस, आत्मबल और बाधाओं से मुक्ति का वरदान प्राप्त होता है।

हनुमान जयंती से पहले मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। प्रमुख हनुमान मंदिरों में प्रातःकाल से ही विशेष अभिषेक, तेल अर्पण, सिंदूर लेपन और वेद मंत्रों के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रामायण के सुंदरकांड तथा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाता है। कई स्थानों पर मंदिरों को फूलों और दीपों से सजाया जाता है, जबकि भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन पूरे दिन चलते रहते हैं।

तमिलनाडु में चेन्नई, कोयंबटूर और तिरुनेलवेली जैसे शहरों के अंजनेय मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। वहीं केरल में भक्त प्रायः हनुमान जी को “वायुपुत्र” के रूप में पूजते हुए नारियल, केला और पारंपरिक नैवेद्य अर्पित करते हैं। कुछ मंदिरों में इस अवसर पर अन्नदान और सेवा कार्य भी आयोजित किए जाते हैं, जो हनुमान जी के सेवा भाव को व्यवहार में उतारने का प्रतीक माने जाते हैं।

सरकारी स्तर पर यह पर्व सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित नहीं होता, लेकिन मंदिर प्रशासन और स्थानीय निकाय सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करते हैं। धार्मिक अनुशासन और शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या पर मनाई जाने वाली दक्षिण भारत की हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि भक्ति, संयम और सेवा की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व श्रद्धालुओं को आंतरिक शक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण का संदेश देता है, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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