हनुमान जयंती स्पेशल 2026: पवन देव के आशीर्वाद से जन्मे थे हनुमान, जानिए पूरी पौराणिक गाथा
हनुमान जयंती 2026 के अवसर पर पवनपुत्र हनुमान की जन्म कथा, उनके दिव्य जन्म, पवन देव के आशीर्वाद, सूर्य को निगलने की घटना, इंद्र के वज्र से ठोड़ी आघात, तथा देवताओं द्वारा दिए गए असीम वरदानों का पौराणिक वर्णन प्रस्तुत किया गया है।

हनुमान जी का एक कलात्मक चित्रण।
मंगलवार, 12 मई 2026 को मनाए जाने वाले हनुमान जयंती पर्व के अवसर पर पवनपुत्र हनुमान से जुड़ी प्राचीन और पौराणिक “हनुमान जन्मोत्सव व्रत कथा” एक बार फिर श्रद्धालुओं के बीच आस्था और भक्ति का केंद्र बन गई है। यह कथा न केवल उनके दिव्य जन्म का वर्णन करती है, बल्कि उनके असाधारण पराक्रम और देवताओं द्वारा प्रदान किए गए वरदानों की विस्तृत गाथा भी प्रस्तुत करती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में सूर्य देव के वरदान से स्वर्णिम पर्वत सुमेरु पर वानरराज केसरी का शासन था। राजा केसरी की पत्नी अंजना अत्यंत सुंदर और दिव्य गुणों से संपन्न थीं। एक बार स्नान के पश्चात जब देवी अंजना वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित थीं, तभी पवन देव ने उनके कान के माध्यम से प्रवेश कर उन्हें यह आशीर्वाद दिया कि उनके गर्भ से एक ऐसा पुत्र जन्म लेगा जो सूर्य, अग्नि और स्वर्ण के समान तेजस्वी होगा तथा वेद-वेदांगों का गहन ज्ञाता और संपूर्ण जगत में पूजनीय बनेगा।
समय आने पर देवी अंजना ने एक दिव्य पुत्र को जन्म दिया, जिन्हें आगे चलकर हनुमान के नाम से जाना गया। कहा जाता है कि यह जन्म चैत्र पूर्णिमा अथवा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पौराणिक कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि के दौरान हुआ था। जन्म के कुछ समय बाद बालक हनुमान को तीव्र भूख लगी। फल की खोज में माता अंजना के जाने पर बालक ने उगते सूर्य को फल समझकर आकाश की ओर छलांग लगा दी। उसी समय राहु सूर्य को ग्रसित करने आया था, किंतु हनुमान जी को देखकर भयभीत होकर भाग गया।
इसी बीच देवराज इंद्र ने उन्हें सूर्य को निगलने से रोकने के लिए अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे उनके ठोड़ी पर आघात हुआ और उनका नाम “हनुमान” पड़ा। इस घटना से क्रोधित होकर पवन देव ने समस्त सृष्टि में वायु का प्रवाह रोक दिया, जिससे ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया और समस्त जीव-जंतु संकट में आ गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समस्त देवता ब्रह्मा जी के साथ पवन देव और हनुमान जी के समक्ष उपस्थित हुए। इसके पश्चात देवताओं ने बालक हनुमान को अनेक दिव्य वरदान प्रदान किए। ब्रह्मा जी ने दीर्घायु का आशीर्वाद दिया, इंद्र ने वज्र से अभेद्यता प्रदान की, सूर्य देव ने उन्हें अपनी तेजस्विता का अंश देते हुए वेदों का ज्ञान दिया, वरुण देव ने जल और पाश से रक्षा का वरदान दिया, यमराज ने मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान की, कुबेर ने शत्रु भय से सुरक्षा दी, भगवान शिव ने अजेयता का आशीर्वाद दिया और विश्वकर्मा ने सभी दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से अभेद्यता प्रदान की।
इन दिव्य वरदानों के कारण हनुमान जी को असीम शक्ति, पराक्रम और अमरत्व प्राप्त हुआ। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, उनके जीवन के अनेक अद्भुत कार्यों का वर्णन रामायण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और वायु पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। माना जाता है कि हनुमान जी की भक्ति, जप, ध्यान और व्रत से समस्त संकटों का नाश होता है तथा भक्तों को अद्वितीय सुख, सम्मान और दिव्य कृपा की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की आराधना से जीवन में कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
