28 मई 2026 को गुरुवार के दिन गुरु प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल का अद्भुत मेल शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। 06:37 से 08:54 बजे तक प्रदोष काल रहेगा, जबकि त्रयोदशी 29 मई तक प्रभावी रहेगी।

28 मई 2026, गुरुवार को आने वाला गुरु प्रदोष व्रत एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण संयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल का दिव्य अधिव्यापन बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब चंद्र मास की त्रयोदशी तिथि शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों में प्रदोष काल के साथ समाहित होती है, तब उसे प्रदोष व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस विशेष दिन सूर्यास्त के पश्चात आरंभ होने वाला प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है, जिसमें की गई साधना और पूजा का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है।

पंचांग गणना के अनुसार 28 मई 2026 को त्रयोदशी तिथि प्रातः 07:56 बजे प्रारंभ होकर 29 मई 2026 को प्रातः 09:50 बजे समाप्त होगी। इसी बीच प्रदोष काल शाम 06:37 बजे से 08:54 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 17 मिनट निर्धारित की गई है। इस अवधि में जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल एक साथ उपस्थित होते हैं, तो इसे शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ योग माना जाता है, जिसे धार्मिक परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।

यह विशेष प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ने के कारण ‘गुरु प्रदोष’ कहलाता है, जिसे बृहस्पति प्रदोष भी कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बृहस्पति ग्रह ज्ञान, शिक्षा, धर्म, धन, विवाह, संतान और पारिवारिक समृद्धि का कारक माना जाता है। ऐसे में गुरु प्रदोष व्रत को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन के विविध क्षेत्रों में प्रगति का साधन भी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ देवगुरु बृहस्पति की ऊर्जा का विशेष प्रभाव माना जाता है, जिससे साधक के जीवन में ज्ञान और समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि गुरु प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन साधकों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है, जो ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके साथ ही यह व्रत विवाह संबंधी बाधाओं, संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की कामना करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन की गई शिव उपासना और व्रत साधना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, विशेषकर जब यह प्रदोष काल और त्रयोदशी तिथि के सटीक संयोग में किया जाए।

इस प्रकार 28 मई 2026 का गुरु प्रदोष व्रत धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक विशेष अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें शिव आराधना और बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभाव का संगम भक्तों के लिए आध्यात्मिक और जीवन उन्नति का संदेश लेकर आता है।

Updated On 26 May 2026 8:03 PM IST
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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