हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत का विशेष महत्व त्रयोदशी तिथि को प्राप्त होता है, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों में मनाया जाता है। यह पावन व्रत विशेष रूप से उस समय अत्यंत फलदायी माना जाता है जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के साथ संगत हो, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इसी दिव्य संयोग में भगवान शिव की आराधना का विशेष विधान बताया गया है।

वर्ष 2026 में गुरु कृष्ण प्रदोष व्रत का आयोजन गुरुवार, 14 मई को निर्धारित है। इस दिन प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:34 बजे से रात्रि 08:52 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 02 घंटे 18 मिनट होगी। इसी अवधि में प्रदोष काल और त्रयोदशी तिथि का संयोग अत्यंत शुभ माना गया है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 14 मई 2026 को सुबह 11:20 बजे प्रारंभ होकर 15 मई 2026 को सुबह 08:31 बजे समाप्त होगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ भी इसके आध्यात्मिक प्रभाव को और अधिक गहरा बनाती हैं। इसी क्रम में बृहस्पति प्रदोष व्रत की कथा का वर्णन शास्त्रों में विस्तार से मिलता है, जिसमें देवताओं और असुरों के बीच हुए भीषण संघर्ष का उल्लेख है।

कथा के अनुसार एक समय देवताओं और वृत्रासुर नामक महाबली राक्षस के बीच भयंकर युद्ध हुआ। वृत्रासुर की शक्ति और माया के सामने देवगण भी पराजित होने लगे। संकट की इस घड़ी में देवताओं ने देवगुरु बृहस्पति का आह्वान किया। बृहस्पति ने देवताओं को वृत्रासुर के पूर्व जन्म और उसकी तपस्या का रहस्य बताया।

कथा में उल्लेख मिलता है कि वृत्रासुर पूर्व जन्म में चित्ररथ नामक राजा था, जिसने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती का उपहास किया था। इस कृत्य के परिणामस्वरूप माता पार्वती ने उसे राक्षस योनि में जन्म लेने का शाप दिया, जिसके बाद वह वृत्रासुर के रूप में उत्पन्न हुआ। बाद में ऋषि त्वष्टा के तप से वह और भी शक्तिशाली बन गया।

देवगुरु बृहस्पति ने देवताओं को सलाह दी कि वृत्रासुर की पराजय केवल शारीरिक शक्ति से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ बृहस्पति प्रदोष व्रत का पालन आवश्यक है। देवताओं ने विधि-विधान के साथ इस व्रत का पालन किया, जिसके प्रभाव से वृत्रासुर का अंत संभव हुआ और देवलोक को संकट से मुक्ति मिली।

शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जो भी श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत का पालन करता है, उसके जीवन के कष्टों का नाश होता है और इच्छित फल की प्राप्ति होती है। गुरु कृष्ण प्रदोष व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भक्ति, संयम और आध्यात्मिक शक्ति का भी संदेश देता है, जो आज भी भक्तों के जीवन में गहरी आस्था का आधार बना हुआ है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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