देशभर में आज गीता जयंती के अवसर पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का माहौल रहा। इस पावन दिन पर, भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सभी परिवारों और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह दिव्य ग्रंथ 'श्रीमद्भगवद्गीता' कर्तव्य पालन और निस्वार्थ कर्म के महत्व को समेटे हुए, भारतीय परिवार, समाज और आध्यात्मिक जीवन में अत्यंत विशिष्ट स्थान रखती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में आगे कहा, “गीता के दिव्य श्लोक प्रत्येक पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे और समाज में आत्मनिष्ठ एवं निस्वार्थ कर्म की भावना को सुदृढ़ करेंगे।” उनके अनुसार, यह ग्रंथ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन के व्यवहारिक और नैतिक पक्ष को समझने के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करता है।


विशेष रूप से, गीता जयंती का पर्व श्रीमद्भगवद्गीता की महत्ता को याद करने और इसके शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का अवसर है। यह दिन महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों की स्मृति में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गीता की शिक्षाएँ आज भी हर नागरिक, चाहे वह छात्र हो या कार्यकर्ता, उसके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

श्री मोदी ने इस अवसर पर गीता के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज में निस्वार्थ कर्म, संयम और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्य केवल व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को भी सशक्त बनाते हैं। उनके अनुसार, गीता की शिक्षाएँ व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के संतुलन को बनाए रखने में मार्गदर्शक हैं।

सरकारी दृष्टि से, इस अवसर पर केंद्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें धार्मिक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और सांस्कृतिक केंद्रों में विशेष प्रवचन, सेमिनार और शिक्षण कार्यशालाएँ शामिल थीं। इस प्रकार, गीता जयंती न केवल आध्यात्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का भी एक माध्यम बनती जा रही है।

प्रधानमंत्री के संदेश ने देशवासियों को यह स्मरण कराया कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसके प्रत्येक कर्म को उद्देश्यपूर्ण बनाने का अनमोल मार्गदर्शन है। यह पर्व प्रत्येक नागरिक को आत्ममंथन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। गीता जयंती के महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि इसकी शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और नैतिक आदर्शों का स्रोत बनी रहेंगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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