ईद-उल-अज़हा 2026 इस्लाम का पवित्र त्योहार 27 मई को मनाए जाने की संभावना है। हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व में मुसलमान नमाज़, क़ुर्बानी और जरूरतमंदों की मदद के जरिए इंसानियत और अल्लाह के प्रति समर्पण का संदेश देते हैं।

इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद या “कुर्बानी का त्योहार” भी कहा जाता है, वर्ष 2026 में पूरी दुनिया के मुसलमानों द्वारा गहरी आस्था और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह त्योहार सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, त्याग और इंसानियत की भावना का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी ईद-उल-अज़हा को लेकर मुस्लिम समुदाय में खास उत्साह और तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

ईद-उल-अज़हा हज यात्रा की समाप्ति के बाद मनाया जाता है और इसका सीधा संबंध हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की उस ऐतिहासिक कुर्बानी से जुड़ा है, जिसने इस्लामी इतिहास में समर्पण और ईमान की सबसे बड़ी मिसाल पेश की। मान्यता के अनुसार, अल्लाह के हुक्म पर हज़रत इब्राहिम अपने बेटे हज़रत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। उनकी इसी अटूट आस्था और आज्ञाकारिता को देखते हुए अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की। इसी घटना की याद में दुनियाभर के मुसलमान ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी अदा करते हैं।

इस पर्व के दौरान ईद की नमाज़ अदा करने के बाद मुसलमान क़ुर्बानी करते हैं, जिसमें बकरा, भेड़, गाय या ऊंट जैसे जानवर शामिल होते हैं। कुर्बानी के मांस का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है, ताकि समाज में बराबरी, मदद और भाईचारे की भावना मजबूत हो सके। इस्लामी परंपराओं के अनुसार, पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) भी ईद-उल-अज़हा के मौके पर लोगों को अपनी कुर्बानी के मांस से खाने और दूसरों को खिलाने के लिए प्रेरित करते थे।

वर्ष 2026 में ईद-उल-अज़हा की शुरुआत मंगलवार 26 मई की शाम से मानी जा रही है, जबकि ईद का मुख्य दिन बुधवार 27 मई 2026 को पड़ने की संभावना है। यह त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाएगा और शुक्रवार 29 मई 2026 तक जारी रहेगा। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, ज़िलहिज्जा का महीना सोमवार 18 मई 2026 से शुरू होने की संभावना है। वहीं हज यात्रा 25 मई 2026 से शुरू होगी और अरफा का दिन 26 मई 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि, इस्लामी पर्वों की तारीखें चांद दिखाई देने पर निर्भर करती हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि स्थानीय चांद कमेटियों द्वारा की जाएगी।

ईद-उल-अज़हा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह त्योहार इंसानियत, त्याग, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान इस दिन अल्लाह के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट करते हैं और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद कर भाईचारे की मिसाल पेश करते हैं। यही वजह है कि बकरीद को इस्लामी संस्कृति और परंपरा का सबसे भावनात्मक और आध्यात्मिक पर्व माना जाता है।

Updated On 23 May 2026 5:35 PM IST
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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