भाई दूज पर भूलकर भी ना करें यह गलती! वरना ठहर सकती है सुख-समृद्धि की राह
भाई दूज या यम द्वितीया, दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला पवित्र पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करते हुए स्नेहपूर्वक भोजन कराती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यमुना ने इसी दिन यमराज को भोजन कराया था, जिससे यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुई।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व भाई दूज, जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और आत्मीय संबंध का प्रतीक है। यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद आता है और इसका धार्मिक तथा पौराणिक दोनों ही दृष्टियों से गहरा महत्व है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित किया और स्नेहपूर्वक भोजन कराया था। यमराज ने अपनी बहन के स्नेह और सत्कार से प्रसन्न होकर इस तिथि को सभी जीवों के कल्याण का दिन घोषित किया। उस दिन नरक में रहने वाले जीवों को भी यातनाओं से मुक्ति मिली और वे पापमुक्त होकर संतोषपूर्वक जीवन जीने लगे। तभी से यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुई।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, जिस दिन यमुना ने यमराज को भोजन कराया था, उसी दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ से भोजन करता है, उसे उत्तम भोजन के साथ-साथ धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र स्नेह का उत्सव है, जिसमें बहन अपने भाई की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती है। समझदार लोगों को इस तिथि को अपने घर मुख्य भोजन नहीं करना चाहिए।
इस दिन बहन अपने भाई को शुभ आसन पर बैठाकर उसके हाथ-पैर धुलाती है, तिलक लगाती है और स्नेहपूर्वक भोजन कराती है। पारंपरिक रूप से इस भोजन में दाल-भात, पूरी, कढ़ी, चूरमा, सीरा, घेवर, जलेबी या खीर जैसे व्यंजन शामिल होते हैं। भाई भी बहन को वस्त्र, आभूषण या उपहार देकर उसके स्नेह का आदर करता है और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करता है।
सगी बहन के अभाव में व्यक्ति अपनी चचेरी, ममेरी या किसी प्रिय मित्र की बहन के घर जाकर यह अनुष्ठान कर सकता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन बहन के हाथ से भोजन ग्रहण करना न केवल पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करता है, बल्कि जीवन में सौभाग्य, दीर्घायु और समृद्धि भी लाता है।
भाई दूज केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भारतीय समाज की उस परंपरा का प्रतीक है जो रिश्तों में प्रेम, आदर और कर्तव्यबोध को सर्वोपरि मानती है। यह पर्व हर वर्ष हमें यह स्मरण कराता है कि स्नेह और परिवार का बंधन जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
