घर में सुख-शांति चाहिए? माँ सरस्वती की आरती के पहले गाए यह वंदना, जीवन भर साथ नहीं छोड़ेगी माँ सरस्वती
बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के पावन अवसर पर यहाँ पढ़ें माँ सरस्वती की संपूर्ण संस्कृत वंदना और महाआरती। 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' श्लोक के साथ पूजा का शुभारंभ करें और 'ओम जय सरस्वती माता' आरती के साथ समापन। अज्ञान के नाश और ज्ञान के प्रकाश के लिए विधि-विधान से करें आराधना। विद्यार्थियों, लेखकों और साधकों के लिए पूजा के अंत में पुष्पांजलि मंत्र सहित विशेष प्रस्तुति।

विद्या, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की उपासना का महापर्व बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर जाने का एक आध्यात्मिक आह्वान है। इस पावन बेला पर शिक्षण संस्थानों से लेकर घर-घर में माँ शारदा की आराधना की तैयारियाँ चरम पर हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए केवल भाव ही नहीं, बल्कि सही शब्दों और विधि-विधान का होना भी आवश्यक है। इसी क्रम में, पूजा का शुभारंभ वैदिक वंदना और समापन पारंपरिक महाआरती के साथ करने का विधान बताया गया है।
पूजा का शुभारंभ: संस्कृत वंदना का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के आरंभ में देवी की स्तुति संस्कृत के उस प्राचीन श्लोक से की जानी चाहिए, जिसमें उनके स्वरूप का अलौकिक वर्णन है। 'सरस्वती वंदना' को आरती से पूर्व गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह वंदना साधक को मानसिक रूप से पूजा के लिए तैयार करती है:
वंदना: "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥"
महाआरती: भक्ति और श्रद्धा का संगम
वंदना और पूजन के पश्चात, जब वातावरण धूप और दीप की सुगंध से भर उठता है, तब 'ओम जय सरस्वती माता' की आरती का स्वर गूंजता है। यह आरती न केवल देवी के गुणों का बखान है, बल्कि इसमें पौराणिक संदर्भ भी समाहित हैं, जैसे मंथरा की दासी के रूप में रावण के संहार में देवी की भूमिका। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहाँ संपूर्ण आरती प्रस्तुत है:
ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय सरस्वती माता...
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ ॐ जय सरस्वती माता...
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ ॐ जय सरस्वती माता...
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ ॐ जय सरस्वती माता...
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥ ॐ जय सरस्वती माता...
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥ ॐ जय सरस्वती माता...
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥ ॐ जय सरस्वती माता...
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
पुष्पांजलि
ज्योतिषाचार्यों और कर्मकांड के जानकारों के अनुसार, आरती संपन्न होने के बाद खाली हाथ नहीं उठना चाहिए। अंत में हाथों में पुष्प लेकर निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए देवी को पुष्पांजलि अर्पित करनी चाहिए, जिससे पूजा पूर्ण मानी जाती है:
मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
इस प्रकार, श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ की गई यह उपासना विद्यार्थियों और कला प्रेमियों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होती है, जिससे जीवन में विवेक और ज्ञान का संचार होता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
