दीपावली क्यों मनाई जाती है: जानें कथा, महत्व और पूजन विधि
जानिए कार्तिक अमावस्या पर क्यों मनाई जाती है दीपावली, भगवान राम की अयोध्या वापसी और मां लक्ष्मी के प्राकट्य से जुड़ी पौराणिक कथा और महत्व।

कार्तिक अमावस्या पर रोशनी के महापर्व दीपावली पर दीप जलाते लोग।
दीपावली भारतीय संस्कृति का ऐसा महापर्व है, जिसके पीछे भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी से लेकर मां लक्ष्मी के प्राकट्य तक अनेक पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। देश-विदेश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाने वाले इस पर्व पर घरों में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं, रंगोलियां सजाई जाती हैं, मिठाइयां बांटी जाती हैं और मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, बुद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की जाती है।
दीपावली का संदेश केवल घरों को रोशन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन के भीतर ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने की प्रेरणा भी देता है। यही कारण है कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना में इस पर्व का विशेष स्थान है।
दीपावली कब और क्यों मनाई जाती है?
हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। यह पर्व सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। दीपावली पांच दिवसीय उत्सव का प्रमुख दिन है। इससे जुड़े प्रमुख पर्वों में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार इनके अनुष्ठानों में कुछ भिन्नताएं देखने को मिलती हैं।
दीपावली का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संबंध भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी से जुड़ा है। मान्यता है कि चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन कर दिया। इसी परंपरा को दीपोत्सव के रूप में देखा जाता है। यह पौराणिक प्रसंग कठिनाइयों और संघर्षों के बाद सत्य, धर्म तथा न्याय की विजय का संदेश देता है।
मां लक्ष्मी के प्राकट्य की पौराणिक कथा
दीपावली का धार्मिक संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों द्वारा क्षीरसागर का मंथन किए जाने के दौरान अनेक दिव्य रत्नों के साथ मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया। इसी मान्यता के चलते कार्तिक अमावस्या की रात्रि में मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्त्व माना जाता है।
एक अन्य लोकप्रचलित मान्यता के अनुसार, दीपावली की रात्रि में स्वच्छ, प्रकाशमय और व्यवस्थित घर में मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसी विश्वास के चलते लोग दीपावली से पहले घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और अपने कार्यस्थलों पर भी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता में मां लक्ष्मी केवल धन की प्रतीक नहीं, बल्कि ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजन विधि
दीपावली के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई की जाती है। संध्या के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य पूजनीय देवी-देवताओं की प्रतिमाएं अथवा चित्र स्थापित किए जाते हैं। पूजा के दौरान रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल, मिठाई, नैवेद्य और जल अर्पित किया जाता है। अनेक परिवारों में इस अवसर पर बहीखातों, तिजोरी और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की भी पूजा की जाती है।
पूजन की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से होती है। उन्हें विघ्नहर्ता और शुभारंभ का देवता माना जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी का आवाहन कर उन्हें दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। कुछ परिवारों में इस अवसर पर कुबेर पूजा और सरस्वती पूजा करने की भी परंपरा है।
दीपावली पूजा के प्रमुख मंत्र
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। मां लक्ष्मी के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और भगवान गणेश के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप किया जाता है।
मां लक्ष्मी का प्रचलित ध्यान मंत्र है—'नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥'
पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती की जाती है तथा परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
दीपावली से जुड़ी अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं
दीपावली का महत्त्व अलग-अलग धर्मों और क्षेत्रों में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के रूप में भी दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में इस दिन मां काली की विशेष पूजा की जाती है। जैन धर्म में दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में विशेष महत्त्व रखती है, जबकि सिख परंपरा में यह पर्व बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस प्रकार दीपावली केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय समाज की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने वाला पर्व भी है।
दीपावली के अवसर पर कुछ परिवार व्रत भी रखते हैं, लेकिन सभी धार्मिक परंपराओं में कोई एक सार्वभौमिक व्रत कथा या व्रत-विधान अनिवार्य नहीं माना गया है। पूजा और व्रत की विधियां परिवार तथा क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
दीपावली का सामाजिक संदेश और जीवन में महत्त्व
दीपावली का पर्व केवल धन-संपत्ति और भौतिक समृद्धि की कामना का अवसर नहीं है, बल्कि यह परिवार के प्रेम, सामाजिक सहयोग, ईमानदारी और मानसिक शांति के महत्त्व को भी रेखांकित करता है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना, आपसी मतभेद भुलाकर संबंधों में मधुरता लाना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना पर्व की मूल भावना को सार्थक बनाता है।
दीपावली हर वर्ष लोगों को नए संकल्पों और नई आशाओं के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की परंपरा से लेकर मां लक्ष्मी की आराधना और दीप प्रज्ज्वलन तक, इस महापर्व का मूल संदेश यही है कि सत्य, धर्म, ज्ञान और सद्भाव का प्रकाश जीवन के हर अंधकार को दूर करने की शक्ति रखता है। दीपक की छोटी-सी लौ भी गहरे अंधकार को चुनौती देने का प्रतीक है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
