दीपावली के पर्व को लेकर इस साल लोगों के मन में तारीखों को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बार छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की तिथियों को लेकर लोगों के बीच चर्चा है कि यह त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा या 9 नवंबर को। पंचांग और विद्वान पंडितों के अनुसार इस बार तिथियों के अद्भुत संयोग के कारण यह स्थिति बनी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस वर्ष दिवाली की सही तारीख क्या है।

छोटी और बड़ी दिवाली की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन

इस वर्ष छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली की तारीखों को लेकर असमंजस इसलिए है क्योंकि इस बार चतुर्दशी तिथि और अमावस्या तिथि एक ही दिन पड़ रही हैं。 छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, बड़े पावन पर्व यानी बड़ी दिवाली को लेकर यह विधान है कि यह त्योहार उस दिन मनाया जाना चाहिए जब रात के समय अमावस्या तिथि मौजूद हो। आइए जानते हैं कि पंडित जी के अनुसार इस बार दोनों पर्व किस दिन मनाए जाएंगे।

कब है छोटी दिवाली 2026?

नरक चतुर्दशी के रूप में जानी जाने वाली छोटी दिवाली इस बार बड़ी दिवाली के साथ ही मनाई जाएगी。 पंडित राकेश झा के अनुसार, इस बार तिथियों का एक बहुत ही अद्भुत संयोग बना है। नियमानुसार छोटी दिवाली चतुर्दशी तिथि में मनाने का विधान है, जो उदय तिथि के अनुसार इस बार 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। छोटी दिवाली के दिन सुबह उठकर औषधि से स्नान करने की परंपरा होती है। यही कारण है कि 8 तारीख को चतुर्दशी के विशेष संयोग को देखते हुए छोटी दिवाली मनाई जाएगी।

कब है बड़ी दिवाली 2026?

पंडित जी का कहना है कि बड़ी दिवाली हमेशा अमावस्या तिथि को ही मनाई जाती है। मां लक्ष्मी के पूजन के लिए यह जरूरी होता है कि प्रदोष काल के समय अमावस्या तिथि होनी चाहिए। इस वर्ष 8 नवंबर को ठीक ऐसा ही अद्भुत संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को दोपहर 11 बजकर 30 मिनट से अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी और यह 9 तारीख को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के नियमों के मुताबिक, प्रदोष काल में अमावस्या मिलने के कारण 8 नवंबर को ही दिवाली का पर्व मनाना पूरी तरह शास्त्र सम्मत है। इसलिए इस बार छोटी और बड़ी दिवाली दोनों एक ही दिन यानी 8 नवंबर को ही मनाई जाएंगी।

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं और कथा के अनुसार, प्राचीन काल में नरकासुर नाम का एक अत्याचारी राक्षस हुआ करता था। उस राक्षस ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हुए लगभग 16 हजार स्त्रियों को अपने बंधन में कैद कर रखा था। नरकासुर के इस बढ़ते आतंक से सभी लोग बहुत अधिक त्रस्त और परेशान थे। जब स्थिति असहनीय हो गई, तब सभी ऋषि-मुनियों और देवताओं ने मिलकर भगवान श्री कृष्ण से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया और सभी देवताओं तथा संतों को उसके अत्याचारों से हमेशा के लिए मुक्त कराया। जिस दिन नरकासुर का वध किया गया था, उस दिन चतुर्दशी तिथि थी। इसी खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था, जिसके बाद से ही छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाने लगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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