December Panchang 2025 : आखिरी महीने में तिथियों की झड़ी; जानें कब किस दिन है बड़ा पर्व
दिसंबर 2025 का माह धार्मिक उत्सवों और पावन तिथियों से जगमगाने वाला है। मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, धनु संक्रांति और बैकुंठ एकादशी सहित पंद्रह बड़े पर्व इस महीने को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। आस्था, व्रत, दान और परंपराओं से भरा पूरा धार्मिक कैलेंडर जानें।

December Panchang 2025
December Panchang 2025 : दिसंबर का आगमन अपने साथ धार्मिक उत्सवों और पावन तिथियों का ऐसा सिलसिला लेकर आया है, जिसने इस महीने को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना व्रत, उपवास, दान और तीर्थस्नान के विविध अनुष्ठानों से भरा है। गीता जयंती, मोक्षदा एकादशी, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, सफला एकादशी और धनु संक्रांति जैसे प्रमुख पर्वों के साथ-साथ दिसंबर के पूरे 31 दिनों में पंद्रह बड़े धार्मिक आयोजन पड़ रहे हैं, जिनके कारण भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
महीने की शुरुआत ही मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती जैसे पुण्यकारी पर्वों से होती है, जो आत्मिक उत्थान और धर्म के सार को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रदोष व्रत, अन्नपूर्णा जयंती और दत्तात्रेय जयंती जैसे आयोजन भक्तों को तप, त्याग और समृद्धि के प्रतीकों से जोड़ते हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत इस महीने की पवित्रता को और गहरा करता है, वहीं इष्टि और अन्वाधान जैसे वैदिक अनुष्ठान हिंदू परंपराओं की गहराई और वैज्ञानिकता को उजागर करते हैं।
दिसंबर के मध्य में अखुरथ संकष्टी चतुर्थी, सफला एकादशी और धनु संक्रांति जैसे पर्व आध्यात्मिक साधना और सूर्योपासना के महत्व को सामने लाते हैं। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ शुभता और पुण्य काल की शुरुआत मानी जाती है, जो इस महीने को और अधिक पावन बना देता है। प्रदोष व्रत, अमावस्या और चंद्र दर्शन जैसे आयोजन भक्तों को आत्ममंथन और साधना के पथ पर अग्रसर होने का अवसर प्रदान करते हैं। साल के सबसे छोटे दिन पड़ने वाला चंद्र दर्शन इस महीने की विशिष्टता को और बढ़ाता है, जिसमें भक्त उपवास और संकल्प के साथ चंद्रमा के दर्शन के उपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं।
महीने के अंतिम सप्ताह में विनायक चतुर्थी, गुरु गोविंद सिंह जयंती और पौष पुत्रदा एकादशी की पावन ध्वनि गूंजती है, जबकि वर्ष के अंतिम दिन बैकुंठ एकादशी का आगमन इस महीने को दिव्यता के चरम पर पहुंचा देता है। मान्यता है कि इस दिन श्रीविष्णु के बैकुंठ धाम के द्वार खुलते हैं और व्रत-उपवास करने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
दिसंबर का यह धार्मिक कैलेंडर न केवल आस्था की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय परंपराएं समय के साथ और अधिक समृद्ध होती जाती हैं। यह महीना वर्ष के अंत को आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह से अभिसिंचित कर देता है, और भक्तों को एक नए संकल्प और उमंग के साथ अगली शुरुआत के लिए तैयार करता है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
