राष्ट्रपति भवन परिसर में इस बार छठ महापर्व का रंग बेहद खास रहा। लोक आस्था और परंपरा से जुड़े इस पर्व को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान से सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की और देशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन का प्रतीक है और हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।


रविवार की शाम को श्रद्धालुओं द्वारा खरना व्रत पूरा किया गया, जो 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत माना जाता है। इस दौरान भक्त जल और अन्न का त्याग करते हैं। घर-घर में खरना का प्रसाद बनाया गया और लोगों ने एक-दूसरे को प्रसाद खिलाकर इस पर्व की शुरुआत की। सोमवार को पर्व के तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया और पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का समापन होगा।

राष्ट्रपति भवन में हुए इस आयोजन में पारंपरिक गीतों, लय और संस्कृति की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारी लोक परंपराओं और प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि यह पर्व हमें जल, वायु और सूर्य जैसे प्राकृतिक तत्वों के प्रति सम्मान की भावना सिखाता है। उन्होंने आशा जताई कि यह पर्व हर घर में शांति और समृद्धि लेकर आए।



इस बार छठ पूजा का उत्सव केवल नदी किनारों तक सीमित नहीं रहा। जयपुर में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी छठ पूजा में भाग लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। वहीं राष्ट्रपति भवन में पहली बार इस पर्व का आयोजन होने पर देशभर में लोगों में विशेष रोमांच देखा गया। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस पर्व का नजारा सबसे भव्य रहा। लाखों की भीड़ के बावजूद घाटों पर शांति और अनुशासन बना रहा। कहीं पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई दी तो कहीं महिलाएं मिट्टी के घड़ों पर दीप सजाकर सूर्य देव की आराधना करती दिखीं। गंगा घाटों से लेकर छोटे तालाबों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।


देशभर में छठ पर्व का उल्लास सोमवार को चरम पर रहा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में लाखों श्रद्धालु गंगा घाटों, तालाबों और सरोवरों में एकत्र हुए। महिलाएं व्रत रखकर पारंपरिक पोशाक में सूर्य देव को अर्घ्य देती नजर आईं। घाटों पर लोकगीतों की गूंज और मिट्टी के दीयों की रौशनी ने श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत माहौल बना दिया। प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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