चंडिका जयंती पर किए गए जप-हवन से मिलेगा हजार गुना फल ; जानिए कब और कैसे करें पूजा
वैशाख पूर्णिमा पर 1 मई 2026 को मनाई जाने वाली चंडिका जयंती का विशेष महत्व, पूजा मुहूर्त, तिथि और धार्मिक मान्यताओं का विस्तृत विवरण। जानिए देवी चंडिका के प्रकट्य दिवस पर जप, हवन और ध्यान का हजार गुना फल क्यों माना जाता है।

चंडिका जयंती 2026
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि:
- चंडिका जयंती: शुक्रवार, 1 मई 2026
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 मई 2026, रात 10:52 बजे
धार्मिक ग्रंथों में देवी चंडिका को द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मा की सृष्टि शक्ति, विष्णु की पालन शक्ति और शिव की संहार शक्ति का मूल स्रोत माना गया है। जब भी धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब देवी चंडिका अपने उग्र स्वरूप में प्रकट होकर संतुलन और धर्म की पुनर्स्थापना करती हैं। इस संदर्भ में प्रचलित श्लोक,
“द्वादशासु विद्यासु चण्डिका सिद्धिदायिनी।
भयार्तानां भयानाशा सर्वसिद्धिप्रदायिनी॥”
यह स्पष्ट करता है कि देवी चंडिका भय को दूर करने वाली और समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली शक्ति हैं। इस कारण, उनके भक्त इस दिन विशेष साधना और उपासना के माध्यम से देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
चंडिका जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। यह दिन भक्तों को आत्मिक उन्नति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है। जैसे-जैसे यह तिथि नजदीक आ रही है, देशभर में मंदिरों और घरों में तैयारियां तेज हो रही हैं, जहां श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से देवी की आराधना कर इस दिव्य अवसर को मनाने के लिए उत्सुक हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
