चंपा षष्ठी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान कार्तिकेय और भगवान खंडोबा को समर्पित है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और परिवार में समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। वर्ष 2025 में यह पर्व 26 नवंबर, बुधवार को पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह का ब्रह्म मुहूर्त (04:37 से 05:30 बजे) सबसे उपयुक्त माना जाता है।

चंपा षष्ठी पूजा विधि और मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें।

भगवान कार्तिकेय और खंडोबा की प्रतिमा या फोटो को पवित्र स्थान पर स्थापित करें।

संकल्प लेकर पूजा का आरंभ करें और भगवान की स्तुति में मंत्रों का उच्चारण करें।

पूजा सामग्री:

हल्दी और चंपा पुष्प (या अन्य ताजे फूल)

नारियल और नैवैद्य (भोजन सामग्री)

दीपक और धूप (अगरबत्ती/धूपबत्ती)

रोली, अक्षत (चावल) और सिंदूर

पूजा की थाली और जल रखने के लिए पात्र

अनुष्ठान:

फूल, हल्दी और नारियल का भगवान को अर्पण करें।

भजन-कीर्तन और आरती करें।

व्रती पूरे दिन उपवास रख सकते हैं या आंशिक रूप से भोजन का त्याग कर सकते हैं।

शाम के समय दीप प्रज्वलित करें और भगवान के चरणों में भक्ति अर्पित करें।

चंपा षष्ठी का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी इसका महत्व है। यह हमें अपने परिवार और समाज के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है। पूजा और व्रत के माध्यम से भक्त जीवन में शांति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन का आयोजन श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो परंपराओं को जीवित रखने और धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने में सहायक होता है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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