बैसाखी 2026: मेष संक्रांति के साथ सूर्यदेव का होगा राशि परिवर्तन, कृषि और अर्थव्यवस्था पर दिखेगा व्यापक असर
सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ शुरू होगा सौर नववर्ष, पुण्य काल में स्नान-दान का है विशेष महत्व, बाजार में दिख सकती है तेजी।

पंजाब के खेतों में बैसाखी के अवसर पर पारंपरिक परिधानों में नृत्य करते हुए ग्रामीण और किसान
भारत की सांस्कृतिक विविधता और कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में बैसाखी का पर्व एक विशेष स्थान रखता है। पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल, मंगलवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन सूर्यदेव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इसे मेष संक्रांति या वैशाख संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, जो सौर नववर्ष के आगमन का प्रतीक है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 14 अप्रैल को प्रातः 9 बजकर 31 मिनट पर सूर्य का गोचर मेष राशि में होगा। इस गोचर के समय वृषभ लग्न प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति के दौरान पुण्य काल का विशेष महत्व होता है, जो इस वर्ष सूर्योदय से लेकर अपराह्न 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस समय अवधि में पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य उपासना और दान-पुण्य करना अक्षय फलदायी माना जाता है।
बैसाखी का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए समृद्धि का उत्सव है। इस समय तक रबी की फसल, विशेषकर गेहूं, पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। किसान अपनी मेहनत का फल प्राप्त करने की खुशी में ढोल-नगाड़ों के साथ भांगड़ा और गिद्दा कर इस उत्सव को मनाते हैं। सिख समुदाय के लिए यह दिन गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाओं और नगर कीर्तन के आयोजन के साथ आध्यात्मिक नववर्ष की शुरुआत का परिचायक है।
आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो इस वर्ष की संक्रांति 'महोदरी' नामक होगी। नक्षत्र और वार के संयोग से बनने वाली इस संक्रांति का बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। ज्योतिषविदों के अनुसार, मेष संक्रांति के प्रभाव से सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे घी, तेल और अन्य वनस्पतियों के मूल्यों में वृद्धि होने की आशंका जताई गई है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में भी इस गोचर के कारण बड़े बदलाव और उलटफेर की संभावना बनी रहेगी। परंपरा के अनुसार, इस दिन लोग घरों की सफाई करते हैं, आंगन में रंगोली सजाते हैं और विविध पकवानों के साथ उत्सव की खुशियां बांटते हैं, जो भारतीय समाज की जीवंतता को दर्शाता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
