अपरा एकादशी 2026 पर मिट सकते हैं जन्मों के पाप ; जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत कथा
अपरा एकादशी 2026 का पावन व्रत 12 मई से 13 मई तक मनाया जाएगा। जानिए एकादशी तिथि, पारण मुहूर्त, भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत का महत्व, श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को बताए गए अपरा एकादशी महात्म्य, पापों के नाश और मोक्ष प्राप्ति से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं तथा इस व्रत से मिलने वाले अद्भुत पुण्य फल की पूरी जानकारी।

भगवान विष्णु का चित्रण
सनातन धर्म में एकादशी तिथि को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है, लेकिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अपरा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली एकादशी माना गया है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत भगवान विष्णु की आराधना और आत्मशुद्धि का दुर्लभ अवसर लेकर आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मनुष्य को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के अनेक कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, अपरा एकादशी की तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 मई 2026 को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। वहीं, व्रत का पारण 14 मई 2026 को प्रातः 06 बजकर 04 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट के बीच किया जाएगा। द्वादशी तिथि का समापन 14 मई को 11 बजकर 20 मिनट पर होगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, कथा श्रवण और उपवास के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करेंगे।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित अपरा एकादशी की कथा का उल्लेख स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद में मिलता है। कथा के अनुसार, अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष एकादशी का नाम, महत्व और व्रत विधि के बारे में प्रश्न किया था। इसके उत्तर में श्रीकृष्ण ने बताया कि इस एकादशी का नाम “अपरा” है, जिसका अर्थ है “असीम” या “अपरंपार”। यह व्रत मनुष्य को असीम पुण्य और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपरा एकादशी के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा कि इस व्रत के पालन से हत्या, निंदा, छल, असत्य भाषण, मिथ्या शास्त्र रचना, झूठी गवाही और अधर्म जैसे गंभीर पाप भी नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति अज्ञानवश या लोभ में पड़कर पापकर्म करता है, वह भी इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति कर सकता है। कथा में यह भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्धभूमि से पलायन करता है या जो शिष्य गुरु की निंदा करता है, उनके लिए भी यह व्रत उद्धार का मार्ग बनता है।
श्रीकृष्ण ने अपरा एकादशी के पुण्य की तुलना अनेक महान धार्मिक कर्मों से की है। मान्यता है कि इस व्रत का फल तीनों पुष्करों में स्नान, कार्तिक मास में पवित्र स्नान, गंगा तट पर पिंडदान, कुंभ के दौरान श्री केदारनाथ धाम के दर्शन, बदरिकाश्रम में निवास और सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्नान के समान प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, यज्ञ में हाथी, घोड़े, स्वर्ण, गौ और भूमि दान का जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य अपरा एकादशी व्रत से भी प्राप्त हो सकता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अपरा एकादशी को पाप रूपी वृक्षों को काटने वाली कुल्हाड़ी और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले सूर्य के समान बताया गया है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की भक्ति और उपासना में लीन होकर आध्यात्मिक उन्नति और विष्णुलोक की प्राप्ति की कामना करते हैं। देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और कथा आयोजन होने की संभावना है, जिससे यह पर्व भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा।
अपरा एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का ऐसा आध्यात्मिक पर्व माना जाता है, जो श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सदाचार की ओर प्रेरित करता है। मान्यता है कि इस व्रत की कथा का श्रवण और पाठ भी समस्त पापों को नष्ट कर जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
