भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ घोषित किए जाने के पीछे क्या है पूरा मामला? जानिए विवाद की पूरी कहानी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त ने वायरल वीडियो विवाद के बाद ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया है। फोरेंसिक जांच में वीडियो को प्रामाणिक बताए जाने के बाद सिख समुदाय से उनके सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार की अपील की गई।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलते-जुलते व्यक्ति का वह कथित वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट
पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक जगत में उस समय भूचाल आ गया जब अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ एक अभूतपूर्व और कड़ा धार्मिक फैसला सुनाया। सिख धर्म की सर्वोच्च सांसारिक संस्था अकाल तख्त ने भगवंत मान को “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित करते हुए वैश्विक सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और राजनीतिक संबंध समाप्त करने की अपील की है। यह फैसला एक वायरल वीडियो को लेकर उठे विवाद के बाद सामने आया है, जिसने पिछले कई महीनों से पंजाब की राजनीति और धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव को बढ़ा दिया था।
विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब एक एनआरआई द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया। वीडियो में कथित तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसे दिखने वाले व्यक्ति को हाथ में शराब का गिलास पकड़े हुए देखा गया। फुटेज में यह भी दिखाई देने का दावा किया गया कि शराब की बूंदें सिख गुरुओं और अन्य पूजनीय धार्मिक हस्तियों के चित्रों पर छिड़क रही हैं। वीडियो में दमदमी टकसाल के पूर्व प्रमुख और दिवंगत सिख नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीर पर भी शराब गिरती हुई दिखाई देने का आरोप लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कई सिख धार्मिक संगठनों ने इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन और गुरुओं के प्रति गंभीर अनादर बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
पंजाब के सीएम भगवंत मान की एक पुरानी वीडियो खूब वायरल हुई थी जिसमें वो सिखों के दस गुरु साहिबान की तस्वीर पर शराब के छींटे मार रहे है,
— Rashpinder Brar (@RashpinderBrar3) June 16, 2026
इस वीडियो को तब आम आदमी पार्टी ने AI से बनाया बताया था, लेकिन अब जाँच में इस वीडियो को सही पाया गया है।
सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल… pic.twitter.com/81yU36yZoH
विवाद बढ़ने पर आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका दावा था कि वीडियो पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया एक डीपफेक है, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। हालांकि, विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों के दबाव के बाद मामले की जांच की मांग तेज हो गई।
इसी क्रम में 15 जनवरी 2026 को भगवंत मान व्यक्तिगत रूप से अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए। उन्होंने वहां भी यही दावा दोहराया कि वीडियो फर्जी है और इसे तकनीकी रूप से तैयार किया गया है। इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे दो स्वतंत्र फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नाम सुझाएं, जो वीडियो की सत्यता की जांच कर सकें। अकाल तख्त के अनुसार, 27 जनवरी को मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार को इस संबंध में दोबारा पत्र भेजा गया, लेकिन कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
A video showed Mr Bhagwant Mann consuming alcohol and splashing liquor on photographs of the Sikh Gurus.
— The Jaipur Dialogues (@JaipurDialogues) June 15, 2026
It’s Unpardonable !
Sri Akal Takht Sahib has declared Punjab CM Mr Bhagwant Mann a Panth Virodhi and Guru Virodhi! pic.twitter.com/nAkQUTnLkx
अकाल तख्त ने बाद में स्वयं पहल करते हुए दो सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई। जांच रिपोर्टों के आधार पर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने दावा किया कि वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग, तकनीकी छेड़छाड़ या एआई जनरेशन के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट में वीडियो को मूल और अप्रभावित बताया गया। इसी निष्कर्ष के आधार पर अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ धार्मिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
16 जून 2026 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित कर दिया। प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री के कृत्य ने सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। इसके साथ ही विश्वभर के सिखों से अपील की गई कि वे मुख्यमंत्री के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक संबंध न रखें और उन्हें कोई मान्यता न दें।
बैठक में केवल मुख्यमंत्री के खिलाफ ही नहीं, बल्कि कनाडा के विन्निपेग स्थित एक गुरुद्वारे के अध्यक्ष निशान सिंह और उसकी पांच सदस्यीय प्रबंधन समिति को भी ‘तनखैया’ घोषित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि गुरुद्वारे से कुछ तस्वीरें हटाने का निर्णय सिख संगत की भावनाओं के विपरीत था और इससे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन हुआ। अकाल तख्त ने सिख समुदाय को निर्देश दिया कि जब तक संबंधित लोग अपनी गलती स्वीकार कर क्षमा नहीं मांगते, तब तक उनसे किसी प्रकार का संबंध न रखा जाए।
विवाद के बीच अकाल तख्त ने पंजाब मंत्रिमंडल के सदस्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के सिख विधायकों को भी तलब किया है। यह समन पंजाब सरकार द्वारा लाए गए नए एंटी-सैक्रिलेज कानून और उससे जुड़े मुद्दों के संदर्भ में जारी किया गया है। बताया गया है कि 29 जून को होने वाली बैठक में इन मामलों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
दूसरी ओर, भगवंत मान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और न ही उन्होंने कभी ऐसा कोई कार्य किया है जिससे सिख भावनाएं आहत हों। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वीडियो वास्तविक था तो इसे कथित घटना के कई महीनों बाद सार्वजनिक क्यों किया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धर्म का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है और उनके विरोधी इस मुद्दे को आगामी चुनावों से पहले हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
Punjab CM Bhagwant Mann has refuted allegations linked to a controversial video, stating that he does not appear in the clip and that the individual shown bears no resemblance to him.
— Being Political (@BeingPolitical1) June 16, 2026
Mann said he clarified the matter before Sri Akal Takht Sahib after being summoned and… pic.twitter.com/zPGTkVKkwJ
मुख्यमंत्री के समर्थन में आम आदमी पार्टी ने भी मोर्चा संभाला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भले ही फोरेंसिक रिपोर्ट वीडियो की तकनीकी प्रामाणिकता की बात करती हो, लेकिन इससे यह सिद्ध नहीं होता कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में भगवंत मान ही हैं। पार्टी ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। उधर, विपक्ष ने अकाल तख्त के फैसले को मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका बताया है। पंजाब भाजपा नेताओं ने भगवंत मान से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि जिस मुख्यमंत्री को अकाल तख्त द्वारा “गुरु दोखी” घोषित कर दिया गया हो, वह नैतिक रूप से सिख बहुल राज्य का नेतृत्व करने का अधिकार खो देता है।
अकाल तख्त ने अपने निर्णय में यह भी संकेत दिया कि उसे अब मुख्यमंत्री से ऐसे शासन संबंधी फैसलों की अपेक्षा नहीं है जो सिख समुदाय की भावनाओं और हितों के अनुरूप हों। हालांकि, पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अकाल तख्त के इस आदेश और आगामी समन को लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
यह विवाद केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला पंजाब की राजनीति, सिख धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों का केंद्र बन चुका है। धार्मिक भावनाओं, राजनीतिक जवाबदेही और सत्ता-संस्थानों के टकराव से जुड़ा यह घटनाक्रम आने वाले समय में पंजाब की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
