अजित पवार का महाप्रयाण: कल होगा अंतिम संस्कार; जानिए एकादशी तिथि पर दाह-संस्कार के पीछे की धार्मिक मान्यता
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती विमान हादसे में निधन। राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित। जानें कल 29 जनवरी को होने वाली अंतिम यात्रा का समय और एकादशी तिथि पर अंतिम संस्कार के धार्मिक महत्व से जुड़ी पूरी रिपोर्ट। क्या कहता है शास्त्र एकादशी पर शवदाह के बारे में? पढ़ें पूरी खबर।

Ajit Pawar Death : महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का आज अत्यंत पीड़ादायक अंत हो गया। बुधवार, 28 जनवरी की सुबह करीब 8:45 बजे बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में अजित पवार सहित विमान में सवार सभी 5 लोगों की मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल पवार परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि समूचे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्य सरकार ने तुरंत प्रभाव से महाराष्ट्र में तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है।
हादसे का विवरण और अंतिम यात्रा का कार्यक्रम प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजित पवार का विमान रनवे पर उतरते समय तकनीकी खराबी का शिकार हुआ और क्रैश हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है और हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
- अंतिम संस्कार: अजित पवार की अंतिम यात्रा गुरुवार, 29 जनवरी को सुबह 9 बजे उनके गृहक्षेत्र बारामती से निकलेगी।
- स्थान: अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में सुबह 11 बजे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा।
- शोक की लहर: राजकीय शोक के दौरान राज्य की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।
- एकादशी तिथि का धार्मिक संयोग: मोक्ष और मान्यताओं का द्वंद्व अंतिम संस्कार के लिए तय दिन यानी 29 जनवरी को 'एकादशी' तिथि पड़ रही है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इस तिथि पर अंतिम संस्कार को लेकर विशेष चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
- मोक्ष की मान्यता: शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि पर मृत्यु होना परम सौभाग्य माना जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्राण त्यागने वाले जीव को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- अन्न वर्जना और परंपरा: वैष्णव परंपरा के जानकारों का मानना है कि एकादशी पर पिंडदान में अन्न का प्रयोग वर्जित होता है, इसलिए कई बार लोग द्वादशी तक प्रतीक्षा करते हैं। हालांकि, धर्मशास्त्रों का एक मत यह भी है कि मृत्यु एक प्राकृतिक घटना है और आत्मा की शांति के लिए विधिपूर्वक यथाशीघ्र संस्कार करना ही श्रेष्ठ है।
प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं विमानन मंत्रालय और DGCA की टीमें बारामती पहुंच चुकी हैं ताकि 'ब्लैक बॉक्स' के जरिए हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। राजकीय सम्मान के साथ होने वाले इस अंतिम संस्कार में देश के बड़े राजनेताओं के शामिल होने की संभावना है, जिसके मद्देनजर बारामती में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
