AI के दौर में कार्यस्थल पर बढ़ी मानवीय चरित्र और नैतिक फैसलों की भूमिका
लंदन में जारी रिपोर्ट के अनुसार AI कार्यक्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन नैतिक निर्णय, जवाबदेही और उद्देश्य निर्धारण की भूमिका केवल मनुष्यों की है।

लंदन में AI के दौर में मानवीय चरित्र और आस्था पर रिपोर्ट जारी की गई।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच कार्यस्थलों पर मानवीय चरित्र, नैतिक निर्णय और जिम्मेदारी की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। Religious Freedom & Business Foundation की ओर से 13 अक्टूबर 2026 को जारी एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि धर्म और व्यक्तिगत आस्था मानवीय चरित्र का एक व्यापक, लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला स्रोत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, AI संगठनों की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन जिम्मेदारी लेने, उद्देश्य निर्धारित करने और निर्णयों के परिणामों का नैतिक आकलन करने की भूमिका मनुष्यों की ही रहती है।
लंदन में जारी The Overlooked Source of Human Capability and Character नामक रिपोर्ट Brian J. Grim, PhD ने तैयार की है। वह Religious Freedom & Business Foundation के संस्थापक अध्यक्ष, Faith@Work UK के एसोसिएट डायरेक्टर और Dare to Overcome के ग्लोबल चेयर हैं। रिपोर्ट की प्रस्तावना A Blueprint for Better Business की CEO Sarah Gillard ने लिखी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI विश्लेषण करने, विकल्प तैयार करने और पहले मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करने में सक्षम है। हालांकि, तकनीकी क्षमता बढ़ने के साथ यह सवाल भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि संगठनों को क्या करना चाहिए और उन्हें किन परिणामों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षमता और चरित्र दोनों आवश्यक हैं। क्षमता में ज्ञान, कौशल और तकनीकी दक्षता शामिल हैं, जबकि चरित्र यह निर्धारित करता है कि अधूरे साक्ष्यों या परस्पर विरोधी प्रोत्साहनों की स्थिति में इन क्षमताओं का उपयोग कैसे किया जाएगा। विवेकपूर्ण निर्णय, ईमानदारी, जिम्मेदारी, विश्वसनीयता, साहस, संरक्षकता और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता को संगठनात्मक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण गुण बताया गया है।
संगठनों को इन गुणों वाले लोगों की आवश्यकता होती है, लेकिन वे इनका निर्माण शून्य से नहीं करते। कर्मचारी अपने परिवारों, समुदायों, शिक्षा, अनुभव, सेवा और धार्मिक या गैर-धार्मिक मान्यताओं से प्रभावित होकर इन गुणों को विकसित करते हैं। ऐसी मान्यताएं जीवन के अर्थ, उद्देश्य और जिम्मेदारी के प्रति उनके दृष्टिकोण को आकार देती हैं।
रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के प्रमुख सर्वेक्षणों में लगभग आधे या उससे अधिक उत्तरदाताओं ने किसी धर्म से जुड़ाव की पहचान बताई है। वैश्विक अनुमानों के मुताबिक, दुनिया की लगभग तीन-चौथाई से लेकर करीब 90 प्रतिशत आबादी किसी न किसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनेक लोगों के लिए आस्था केवल पहचान का लेबल या कार्यस्थल पर सुविधा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि उनके विश्वास, व्यवहार और सामुदायिक संबंधों का हिस्सा है।
रिपोर्ट ने इस विषय को कारोबारी संस्कृति और कंपनियों के दीर्घकालिक मूल्य से भी जोड़ा है। इसमें 400 प्रमुख कंपनियों की समीक्षा का हवाला देते हुए कहा गया है कि नवाचार, ईमानदारी और लोगों पर ध्यान देने जैसे घोषित मूल्य तभी व्यवहार में उतरते हैं, जब उन्हें चरित्र का समर्थन मिलता है। रिपोर्ट में Barclays की LIBOR और विदेशी मुद्रा संबंधी विफलताओं को इस बात की चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया गया है कि गलत आचरण संगठनात्मक संस्कृति में गहराई से समा सकता है। इसके विपरीत, Baringa के Economics of Kindness शोध का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दूसरों के प्रति संवेदनशीलता अपनाना व्यावसायिक प्रदर्शन की कीमत पर होना जरूरी नहीं है।
रिपोर्ट में Meta के अगस्त 2026 के उस समझौते का भी उल्लेख है, जिसके तहत बच्चों में बाध्यकारी उपयोग को प्रोत्साहित करने के आरोपों से जुड़े फीचर्स के मामले में कंपनी लगभग 18 अरब डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हुई। इसे संगठनात्मक निर्णयों, जिम्मेदारी और उनके संभावित परिणामों के महत्व के संदर्भ में रखा गया है।
कंपनियों में धर्म और आस्था से जुड़े प्रयासों की स्थिति का आकलन करने के लिए Foundation के 2026 REDI Monitor के सार्वजनिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अनुसार, FTSE 100 की 42 कंपनियों में उभरते, विकसित या अग्रणी स्तर की गतिविधियां दिखाई दीं। इनमें 18 कंपनियां अग्रणी स्तर पर थीं। वहीं, 22 कंपनियों में ऐसी गतिविधियों के सीमित सार्वजनिक प्रमाण मिले और 36 कंपनियों में कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं मिला। इस प्रकार, कुल 58 कंपनियों में सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली गतिविधियां सीमित थीं या उनके प्रमाण उपलब्ध नहीं थे। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह निगरानी व्यवस्था कंपनियों के भीतर चल रही कुछ गतिविधियों को दर्ज करने में चूक सकती है।
Equinix, Accenture, Coca-Cola Consolidated, Japan Airlines और Philip Morris International के उदाहरणों के माध्यम से रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्यस्थल पर आस्था और मान्यताओं को जगह देने का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है। इसकी शुरुआत संकट के समय नेतृत्व, कर्मचारी नेटवर्क, संगठन के उद्देश्य या प्रबंधन संबंधी दर्शन से हो सकती है।
रिपोर्ट में कंपनियों के निदेशक मंडलों से कहा गया है कि वे कर्मचारियों की मान्यताओं का समर्थन करने या उनका मूल्यांकन करने की भूमिका न अपनाएं। किसी भी धार्मिक परंपरा को अच्छे आचरण की गारंटी नहीं माना जा सकता। धार्मिक विभाजन, दूसरों को अपने धर्म की ओर आकर्षित करने के प्रयास, परस्पर प्रतिस्पर्धी अधिकार, कार्यस्थल पर सुविधाएं, निष्पक्षता और निजता से जुड़ी चिंताओं का समाधान तटस्थता, स्वैच्छिक भागीदारी और दबाव से सुरक्षा के जरिए किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि उद्देश्य कार्यस्थल को धार्मिक बनाना नहीं, बल्कि चरित्र के एक अनदेखे स्रोत को पहचानना और उसके योगदान के लिए उचित परिस्थितियों का प्रबंधन करना है। इसमें Sarah Gillard ने मूल्यों और कारोबारी मूल्य के बीच किसी अनिवार्य टकराव की धारणा को भी खारिज किया है। उनके अनुसार, S&P 500 कंपनियों के मूल्यांकन में अमूर्त परिसंपत्तियों का हिस्सा 1975 में 17 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया। AI के दौर में केवल दक्षता के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, निदेशक मंडलों को मौजूदा निगरानी व्यवस्था के भीतर यह पहचानना चाहिए कि धर्म या आस्था कर्मचारियों के चरित्र का एक अनदेखा स्रोत हो सकती है। जो कर्मचारी स्वेच्छा से अपनी मान्यताओं को कार्यस्थल पर साझा करना चाहते हैं, उनके लिए उचित अवसर उपलब्ध कराने, उनसे मिलने वाले दृष्टिकोणों को महत्व देने तथा आचरण, सुविधाओं और निजता के प्रबंधन की समीक्षा करने की सिफारिश की गई है।
यह रिपोर्ट Religious Freedom & Business Foundation और Faith@Work UK की ओर से जारी की गई है। इसका केंद्रीय संदेश है कि AI से संगठनों की तकनीकी क्षमता बढ़ने के साथ मानवीय चरित्र, जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण निर्णयों की जरूरत कम नहीं होती, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

Pratahkal Bureau
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