Yashoda jayanti पर बन रहा है दुर्लभ संयोग; जानें कब है यशोदा जयंती और क्या है पूजा का शुभ समय?
Yashoda jayanti 2026 की सटीक तारीख और शुभ मुहूर्त जानें। 7 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा माता यशोदा का जन्मोत्सव। जानें फाल्गुन षष्ठी का महत्व, पूजा विधि और भगवान विष्णु के उस वरदान की कथा जिसने देवकी के पुत्र को यशोदा का लाडला बना दिया। संतान सुख और पारिवारिक शांति के लिए इस दिन व्रत रखने का विशेष विधान है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Yashoda Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में मातृत्व, त्याग और निस्वार्थ प्रेम का पर्याय मानी जाने वाली माता यशोदा का जन्मोत्सव यानी 'यशोदा जयंती' श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का विषय है। श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को सहेजने वाली माता यशोदा की जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में इस पर्व को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है, क्योंकि यह दिन न केवल व्रत और पूजन का है, बल्कि उस दिव्य वरदान के स्मरण का भी है जिसके चलते स्वयं श्री हरि विष्णु को बालक बनकर यशोदा की गोद में आना पड़ा था।
पौराणिक महत्व: जब तपस्या से प्रसन्न हुए श्री हरि
कथाओं के अनुसार, माता यशोदा ने अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। जब भगवान ने वरदान मांगने को कहा, तो यशोदा जी ने उन्हें पुत्र रूप में प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की। भगवान विष्णु ने वचन दिया कि वे देवकी के गर्भ से जन्म तो लेंगे, लेकिन मातृत्व का वास्तविक सुख केवल यशोदा को ही प्रदान करेंगे। यही कारण है कि वासुदेव ने जन्म के तुरंत बाद कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के पास छोड़ दिया, जहाँ उन्होंने कान्हा का पालन-पोषण किया।
यशोदा जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में तिथि के उतार-चढ़ाव को लेकर विद्वानों और भक्तों के बीच संशय स्पष्ट हो गया है। पंचांग के अनुसार गणना इस प्रकार है:
- मुख्य तिथि: यशोदा जयंती 07 फरवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 07 फरवरी 2026 को सुबह 1:18 बजे से।
- षष्ठी तिथि समापन: 08 फरवरी 2026 को सुबह 2:54 बजे तक।
- व्रत और अनुष्ठान: चूंकि उदया तिथि और प्रमुख समय 7 फरवरी को मिल रहा है, इसलिए सभी धार्मिक अनुष्ठान शनिवार को ही संपन्न किए जाएंगे।
पूजा विधि और परंपराएं :
इस विशेष दिन पर विवाहित महिलाएं संतान सुख और पारिवारिक कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। पूजन की प्रक्रिया अत्यंत सात्विक और भक्तिपूर्ण होती है:
- श्रृंगार: भक्त सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करते हैं और माता यशोदा व बाल कृष्ण की प्रतिमा को भी पीले वस्त्रों से सुसज्जित करते हैं।
- भोग: कान्हा के प्रिय माखन-मिश्री का भोग लगाना इस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
- अर्चन: तुलसी, रोली, चंदन और ताजे फलों के साथ गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है।
सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव :
यशोदा जयंती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में मां के उस स्वरूप का सम्मान है जो रक्त के रिश्ते से ऊपर उठकर पालन-पोषण और स्नेह को प्रधानता देता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से किया गया व्रत न केवल संतान की रक्षा करता है, बल्कि घर में सुख-शांति और आपसी सौहार्द की स्थापना भी करता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
