मऊ में महादेव का भव्य अवतार: 61 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और 'महा आरती' से गूंजी तमसा नदी, विकास और आस्था का अद्भुत संगम!
उत्तर प्रदेश के मऊ में 'महादेव धाम' का भव्य उद्घाटन। मंत्री ए.के. शर्मा ने किया 61 फीट ऊंची नीलकंठ प्रतिमा का शिवार्पण। जानें गायघाट के कायाकल्प और दिव्य महा आरती की पूरी रिपोर्ट।

15 फरवरी 2026, मऊ (उत्तर प्रदेश):
आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश का मऊ जिला भक्ति के एक नए शिखर पर पहुंच गया है। शहर के मध्य से बहने वाली पावन तमसा नदी के तट पर स्थित 'गायघाट' आज केवल एक घाट नहीं, बल्कि आस्था का एक जादुई केंद्र बन गया। दोपहर 3 बजे जब शंखों की गूँज और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच 61 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा का अनावरण हुआ, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं।
आस्था और विकास की नई पहचान: महादेव धाम
मऊ के ही रहने वाले और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री ए. के. शर्मा ने आज इस भव्य 'महादेव धाम' का शिवार्पण किया। उनके लिए यह पल भावुक कर देने वाला था, क्योंकि उन्होंने अपने गृह जनपद को एक ऐसा आध्यात्मिक उपहार दिया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।
गायघाट का कायाकल्प किसी सपने के सच होने जैसा है। जहाँ कभी गंदगी और उपेक्षा थी, आज वहाँ एक भव्य सफेद मंदिर परिसर और चमकता हुआ रिवरफ्रंट है। नीले रंग की विशालकाय शिव प्रतिमा, जो ध्यान की मुद्रा में विराजमान है, दूर से ही भक्तों को अपनी ओर खींच लेती है।
दृश्य जो दिल जीत ले: दीपों की माला और उत्सव का मेला
महाशिवरात्रि की शाम जैसे-जैसे ढली, मऊ का आकाश दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। ड्रोन कैमरों से लिए गए हवाई दृश्यों ने दिखाया कि पूरा मंदिर परिसर दूधिया रोशनी में नहाया हुआ है।
- घाट की सीढ़ियां: नदी की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर हजारों दीये टिमटिमा रहे थे, जो जल में अपना प्रतिबिंब बना रहे थे।
- मेला और आनंद: परिसर के पास ही बड़े-बड़े झूले (फैरिस व्हील) लगाए गए हैं, जहाँ बच्चे और परिवार उत्सव का आनंद ले रहे हैं। यह नजारा भक्ति और सामाजिक उल्लास का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा था।
एक मासूम गले मिलना: इंटरनेट पर वायरल हुआ भावुक पल
आज के इस आयोजन का सबसे सुंदर और मानवीय दृश्य वह था, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उद्घाटन के बाद एक छोटा बच्चा दौड़कर गया और प्रतिमा के आधार (बेस) से लिपट गया, जैसे वह साक्षात महादेव को गले लगा रहा हो। इस तस्वीर ने लोगों का दिल जीत लिया। एक स्थानीय निवासी ने ट्विटर (X) पर लिखा, "यह केवल एक मूर्ति नहीं है, यह हमारे मऊ का रक्षक है, जो अब हर मुश्किल में हमारा मार्गदर्शन करेगा।"
आधुनिकता के साथ आध्यात्मिकता का संगम
महादेव धाम का निर्माण केवल धार्मिक नजरिए से नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।
- रिवरफ्रंट डेवलपमेंट: गायघाट को अब काशी के घाटों की तर्ज पर विकसित किया गया है, जहाँ शाम को नियमित रूप से 'तमसा आरती' का आयोजन होगा।
- सांस्कृतिक हब: स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थान अब केवल पूजा-पाठ का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शहर के लोगों के लिए शाम बिताने और शांति पाने का एक सुंदर स्थल बन गया है।
- अर्थव्यवस्था को गति: इस नए आध्यात्मिक केंद्र के बनने से स्थानीय छोटे दुकानदारों और हस्तशिल्पियों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
मंत्री ए.के. शर्मा का संदेश
शिवार्पण समारोह के दौरान मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा, "महादेव की यह 61 फीट ऊंची प्रतिमा मऊ के गौरव का प्रतीक है। तमसा नदी के तट पर स्थापित यह धाम हमारी जड़ों से जुड़ने और विकास की नई ऊंचाई छूने का संदेश देता है।" उन्होंने इस परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रशासन और इंजीनियरों की सराहना भी की।
मऊ के लिए एक नया सवेरा
15 फरवरी 2026 की यह शाम मऊ के इतिहास में दर्ज हो गई है। महादेव की वह अभय मुद्रा वाली नीली प्रतिमा और मंदिर की सफेद दीवारों की शांति लोगों को सुकून दे रही है। आस्था जब विकास के साथ हाथ मिलाती है, तो परिणाम 'महादेव धाम' जैसा ही सुंदर होता है। आज मऊ का हर नागरिक गर्व से कह रहा है—हमारा शहर अब बदल गया है, और महादेव स्वयं हमारे साथ विराजमान हैं।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
