आस्था और अस्मिता का संगम: सोमनाथ की चौखट पर मोदी; प्रथम ज्योतिर्लिंग के अभिषेक से शुरू हुआ 'स्वाभिमान पर्व'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में किया प्रथम ज्योतिर्लिंग का दिव्य दर्शन और महाअभिषेक। 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के विशेष अवसर पर सौराष्ट्र पहुंचे पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान को किया नमन। जानिए मंदिर के पुनरुद्धार के 75 वर्ष और आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम और पीएम के दौरे की हर एक अहम जानकारी इस विशेष लेख में।

PM Modi Somnath Temple visit in January :
सोमनाथ (गुजरात)। भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण की गाथा में आज एक नया अध्याय तब जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौराष्ट्र की पवित्र धरती पर स्थित देवाधिदेव महादेव के प्रथम ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ मंदिर में शीश नवाया। यह दौरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के माध्यम से राष्ट्र की अटूट श्रद्धा और संघर्षपूर्ण गौरवशाली इतिहास को नमन करने का एक दिव्य अवसर है। जैसे ही प्रधानमंत्री का विमान सौराष्ट्र की भूमि पर उतरा, वहां के जनमानस ने अपने 'बेटे' का गर्मजोशी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के साथ स्वागत किया, जिससे समूचा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया।
सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करते ही प्रधानमंत्री मोदी ने शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ भगवान सोमनाथ का महाअभिषेक और विशेष पूजन संपन्न किया। मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस जलाभिषेक ने आध्यात्मिकता की एक ऐसी लहर पैदा की, जिसे वहां मौजूद हर श्रद्धालु ने महसूस किया। उल्लेखनीय है कि सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमणों के 1000 वर्ष और इसके आधुनिक पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस 'स्वाभिमान पर्व' को भव्य बनाने के लिए श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। प्रधानमंत्री ने न केवल महादेव की आराधना की, बल्कि मंदिर परिसर में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भी सहभागिता कर इस ऐतिहासिक अवसर को अविस्मरणीय बना दिया।
आधिकारिक तौर पर इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री स्वयं श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उनके इस प्रवास के दौरान मंदिर के बुनियादी ढांचे के विकास और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की भी संभावना है, जो सोमनाथ को वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। शासन और प्रशासन ने इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं, जिसमें आधुनिक तकनीक और सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा शामिल है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह दौरा क्षेत्र के सांस्कृतिक पर्यटन को एक नई गति देने के साथ-साथ देश की प्राचीन विरासत के प्रति युवाओं में गर्व की भावना जागृत करने का काम करेगा।
प्रधानमंत्री का यह सोमनाथ आगमन एक सशक्त संदेश देता है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों से कटकर नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सींचकर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ मंदिर, जो अतीत में कई बार विनाश का गवाह बना, आज प्रधानमंत्री की उपस्थिति में भारत के अडिग स्वाभिमान का प्रतीक बनकर खड़ा है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि सत्य और आस्था की शक्ति अंततः हर विनाशकारी बल पर विजय प्राप्त करती है। शाम की आरती के साथ जब सोमनाथ का तट 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा, तो वह क्षण नए भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास की एक नई इबारत लिख गया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
