आस्था और आरोप का द्वंद्व: यूपी के टैक्स अधिकारी का इस्तीफा या विवादों से बचने का दांव?
अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपमान पर दिया इस्तीफा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद और अधिकारी पर लगे फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आरोपों ने मामले को उलझा दिया है। जानिए 28 जनवरी 2026 की इस बड़ी प्रशासनिक हलचल की पूरी सच्चाई।

अयोध्या/लखनऊ | 28 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक निष्ठा, धार्मिक विवाद और व्यक्तिगत आरोपों का एक ऐसा जटिल ताना-बाना है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इस्तीफे का कारण: 'मानसिक पीड़ा' और स्वामी का अपमानजनक रुख
प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए बेहद चौंकाने वाले कारणों का हवाला दिया। सिंह का दावा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणियों से वे गहरे 'मानसिक कष्ट' में हैं।
- विवाद की जड़: यह पूरा मामला प्रयागराज के माघ मेले में हुई एक झड़प से शुरू हुआ था। वहां पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए स्वामी के रथ को रोक दिया था और उन्हें नोटिस जारी किया था। इसके बाद स्वामी ने प्रशासन और सरकार पर तीखे प्रहार किए थे।
- अधिकारी का तर्क: सिंह का कहना है कि एक सरकारी सेवक होने के साथ-साथ वे सरकार की नीतियों और नेतृत्व में अटूट आस्था रखते हैं, और स्वामी के अपमानजनक शब्दों ने उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
नया मोड़: 'फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र' का सनसनीखेज आरोप
कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब प्रशांत कुमार सिंह के अपने भाई ने ही उन पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगा दिए। आरोपों के अनुसार, सिंह ने साल 2011 में सरकारी सेवा में प्रवेश पाने के लिए 'फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र' (Fake Disability Certificate) का सहारा लिया था।
- विभागीय जांच: इस शिकायत के बाद शासन स्तर पर एक उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
- राजभवन का रुख: अभी तक राज्यपाल द्वारा सिंह का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस्तीफे पर फैसला टल सकता है।
निष्ठा या रणनीति?
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या यह इस्तीफा वास्तव में वैचारिक आहत होने का परिणाम है, या फिर भ्रष्टाचार की जांच से बचने के लिए चली गई एक 'इमोशनल' चाल? कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप सही पाया जाता है, तो इस्तीफा स्वीकार होने के बावजूद सिंह को कानूनी कार्रवाई और पेंशन जैसे लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है।

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