वैभव लक्ष्मी व्रत 2025 : वैभव लक्ष्मी व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे श्रद्धालु देवी लक्ष्मी से समृद्धि, संपत्ति और आनंद प्राप्त करने के लिए 11 या 21 शुक्रवारों तक पालन करते हैं। इस व्रत में पुरुष और महिलाएं दोनों अष्ट-लक्ष्मी की पूजा करते हैं, व्रत कथा का पाठ करते हैं और नैवेद्य अर्पित करते हैं।

व्रत की शुरुआत शुक्रवार से होती है और इसे निर्धारित सप्ताहों तक लगातार रखा जाता है। श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और शुद्धता के साथ पूजा की तैयारी करते हैं। पूजा स्थल पर लाल कपड़े से सजाई गई चौकी पर लक्ष्मी जी की मूर्ति या प्रतिमा रखी जाती है, साथ ही श्रीयंत्र और तांब्य के भांड़े में पानी और तांदूळ (चावल) रखे जाते हैं। चावल पर चांदी या सोने के आभूषण तथा सिक्के अर्पित किए जाते हैं। दीपक जलाकर दिनभर लक्ष्मी मंत्रों का जप किया जाता है और संध्या में वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ी जाती है।

उपवास का समापन यानी "उद्यपान" अंतिम शुक्रवार को होता है। इस दिन विशेष प्रसाद के रूप में खीर बनाई जाती है। पूजा के बाद देवी लक्ष्मी के समक्ष नारियल फोड़कर श्रद्धालु देवी का आभार व्यक्त करते हैं। इसके अलावा सात या अधिक अविवाहित लड़कियों या अन्य महिलाओं को खीर और व्रत कथा कही जाती है। इस प्रकार श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार में खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।

वैभव लक्ष्मी व्रत न केवल धार्मिक कृत्य का प्रतीक है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुशासन, सदाचार और समर्पण का भी मार्गदर्शन करता है। इस व्रत के माध्यम से परिवार में सुख, समृद्धि और नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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