राम मंदिर निर्माण के पूर्ण हो जाने के बाद अब सबकी निगाहें मस्जिद निर्माण पर टिकी थीं। लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद मस्जिद की नींव भी न रखे जाने से यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है।

अयोध्या। बाबरी मस्जिद विवाद का इतिहास किसी से छिपा नहीं है। 1992 में मस्जिद ढहाए जाने के बाद वर्षों तक चला विवाद आखिरकार 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के साथ समाप्त हुआ। अदालत ने अपने आदेश में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए पाँच एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद जहां अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण तेजी से हुआ और उसका उद्घाटन भी हो गया, वहीं मस्जिद निर्माण की प्रक्रिया अब तक ठप पड़ी है।

फैसले के अनुपालन में 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित की। इस भूमि पर मस्जिद निर्माण के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसने चंदा जुटाने के साथ 23 जून 2021 को अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन भी दायर किया।

RTI के माध्यम से सामने आई जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट ने ADA में आवेदन और जाँच शुल्क के तौर पर 4 लाख रुपये जमा किए थे। लेकिन निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जिन विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) आवश्यक था, वह आज तक जारी नहीं हो सका। इन विभागों में लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग शामिल हैं। चूँकि अब तक इन विभागों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए ADA ने मस्जिद के लेआउट प्लान को खारिज कर दिया।

इस पूरे मामले ने मुस्लिम समुदाय और मस्जिद ट्रस्ट के भीतर निराशा का माहौल बना दिया है। भूमि उपलब्ध होने और धन जुटाए जाने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं ने निर्माण को रोक रखा है। वहीं, ADA का कहना है कि बिना सभी आवश्यक NOC के किसी भी निर्माण योजना को मंजूरी देना संभव नहीं है, क्योंकि यह कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर निर्माण कार्य की प्रक्रिया और भी अधिक सतर्कता की मांग करती है। NOC की आवश्यकता केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि निर्माण कार्य सभी कानूनी, पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।

राम मंदिर निर्माण के पूर्ण हो जाने के बाद अब सबकी निगाहें मस्जिद निर्माण पर टिकी थीं। लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद मस्जिद की नींव भी न रखे जाने से यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है। अब सवाल यह है कि प्रशासनिक प्रक्रियाएँ कब तक पूरी होंगी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप मस्जिद निर्माण का मार्ग कब साफ होगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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