पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और सामूहिक कार्रवाई को वैश्विक मंच प्रदान करने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अवसर है, जिसमें सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, व्यवसायिक संस्थाओं और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है।

इस महत्वपूर्ण दिवस की शुरुआत वर्ष 1973 में हुई थी, जबकि इसकी नींव 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन के दौरान रखी गई थी। यह सम्मेलन मानव जीवन और पर्यावरण के बीच संतुलन तथा पारस्परिक संबंधों पर वैश्विक स्तर पर हुई चर्चाओं का परिणाम था। इसके अगले ही वर्ष, 1973 में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया, जिसका पहला विषय “Only One Earth” था, जिसने पृथ्वी के सीमित संसाधनों और उनके संरक्षण की आवश्यकता को दुनिया के सामने मजबूती से रखा।

समय के साथ यह दिवस एक वैश्विक अभियान के रूप में विकसित हुआ, जो अब हर वर्ष 143 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राज़ील, कनाडा, चिली, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इज़राइल, इटली, जापान, मैक्सिको, नीदरलैंड, नॉर्वे, फिलीपींस, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, थाईलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। इस अवसर पर पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे समुद्री प्रदूषण, अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि, ग्लोबल वार्मिंग, सतत विकास और वन्यजीव अपराध जैसे गंभीर विषयों पर व्यापक जागरूकता फैलाई जाती है।

वर्ष 2026 के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “Inspired by Nature. For Climate. For Our Future.” घोषित की गई है, जो प्रकृति की प्रेरणा से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और भविष्य की सुरक्षा के दृष्टिकोण को केंद्र में रखती है। इस थीम के तीन प्रमुख स्तंभ भी निर्धारित किए गए हैं, जिनमें “Inspired by Nature” प्रकृति के पारिस्थितिक तंत्र जैसे आर्द्रभूमि और वनों को कार्बन अवशोषण और जलवायु लचीलापन का सर्वोत्तम मॉडल मानता है। “For Climate” वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। वहीं “For Our Future” आने वाली पीढ़ियों के लिए रहने योग्य और सतत पर्यावरण सुनिश्चित करने की अंतरपीढ़ीगत जिम्मेदारी पर बल देता है।

विश्व पर्यावरण दिवस आज केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर नीति-निर्माण, जन-जागरूकता और पर्यावरणीय कार्रवाई का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। बढ़ते जलवायु संकट के बीच यह दिवस मानव समाज को यह स्मरण कराता है कि प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा का आधार है और इसके बिना सतत विकास की कल्पना अधूरी है।

Updated On
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story