vultures population decline : देश में गिद्धों की आबादी में लगातार गिरावट ने पर्यावरण विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षणists में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पहले देश के कई हिस्सों में आसानी से देखे जाने वाले ये महत्वपूर्ण पक्षी अब लगभग 72 प्रतिशत क्षेत्रों से गायब हो चुके हैं। हाल के सर्वेक्षणों में सामने आया है कि पहले 425 स्थानों पर गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की जाती थी, जो अब मात्र 67 स्थानों तक सीमित रह गई है। यह स्थिति न केवल पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है।

गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्ता की भूमिका निभाते हैं और मरे हुए जानवरों के शरीर को खाकर बीमारियों के फैलने की संभावना को कम करते हैं। यदि उनकी संख्या में यह गिरावट जारी रही, तो पारिस्थितिकी संतुलन प्रभावित होगा और बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2 दिसंबर 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इस गिरावट के कारणों की जानकारी तलब की है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि गिद्धों की इतनी तेजी से घटती आबादी जैव विविधता अधिनियम 2002 के उल्लंघन का संकेत देती है। अदालत ने वन महानिदेशक, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

vultures population decline

हाल ही में बेंगलुरु स्थित एनसीबीएस-टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, कर्नाटक वल्चर कंजर्वेशन ट्रस्ट, बीएनएचएस, यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज और ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी के शोधकर्ताओं ने गिद्धों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत अध्ययन किया। अध्ययन में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के संरक्षित और गैर-संरक्षित क्षेत्रों से 642 मल-नमूने एकत्र किए गए। डीएनए विश्लेषण से 419 नमूनों में गिद्धों की प्रजातियों और उनके आहार पैटर्न की सटीक पहचान की गई। अध्ययन में पाया गया कि डाइक्लोफेनेक जैसी दवाओं का उपयोग गिद्धों की घटती आबादी का मुख्य कारण है।

वर्तमान में गिद्ध केवल 67 स्थानों पर देखे जा सकते हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि यदि समय रहते संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो देश के गिद्ध गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। यह जैव विविधता और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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