उत्तराखंड के घने जंगल इन दिनों एक भयावह आपदा की चपेट में हैं, जहां राज्य भर में 200 से अधिक स्थानों पर आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सूखे मौसम और बढ़ती गर्मी के बीच जंगलों में लगी यह आग अब तेजी से फैलती हुई बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप लेती जा रही है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में एक ही दिन में 200 से अधिक फायर अलर्ट दर्ज किए गए, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं।

यह आग मुख्य रूप से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में फैल रही है, जहां कई जिलों में एक साथ कई स्थानों पर जंगल जल रहे हैं। नैनीताल, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे जिले इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। रुद्रप्रयाग जिले में वन विभाग के अनुसार इस सीजन में अब तक 20 अलग-अलग वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 15 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। यह आग आरक्षित वन क्षेत्रों, वन पंचायतों और राजस्व भूमि तक फैल चुकी है, जिससे नुकसान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

रुद्रप्रयाग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर राजत सुमन ने इस बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि कई मामलों में आग जानबूझकर लगाई जा रही है, जिसके चलते स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है। यह बयान इस आपदा के पीछे मानवीय लापरवाही और संभावित आपराधिक गतिविधियों की ओर भी संकेत करता है, जिससे प्रशासन के सामने चुनौती और बढ़ गई है।

इस पूरे घटनाक्रम का व्यापक असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अप्रैल 2026 के दौरान राज्य में 1,000 से अधिक फायर अलर्ट दर्ज किए जा चुके हैं, जो इस वर्ष को वनाग्नि के लिहाज से बेहद चिंताजनक बना रहा है। जंगलों से उठता घना धुआं न केवल पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। इसके साथ ही जैव विविधता, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और वनस्पतियों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी की कमी ने जंगलों को अत्यधिक शुष्क बना दिया है, जिससे वे आग के लिए बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इसके अलावा बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन भी इस तरह की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहे हैं। वहीं, कुछ मामलों में मानव लापरवाही और जानबूझकर लगाई गई आग ने हालात को और अधिक विकट बना दिया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वन विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने के प्रयासों में जुटी हैं और सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है ताकि नई घटनाओं का तुरंत पता लगाया जा सके। इसके बावजूद, जिस तेजी से आग फैल रही है, वह राज्य के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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