उत्तराखंड के गंगोत्री हाईवे पर चल रहे चार धाम परियोजना के चौड़ीकरण कार्य ने हाल ही में नई बहस को जन्म दिया है। पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों के अनुसार, झाला से जांगला के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए लगभग 6,000 देवदार (सीडर) वृक्षों को काटने की योजना बनाई गई है। यह कदम न केवल पहाड़ी ढालों को अस्थिर कर सकता है बल्कि क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

इस सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य तीर्थयात्रियों और दूर-दराज़ हिमालयी क्षेत्रों से बेहतर संपर्क सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र में विकास और सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी है। हालांकि, पर्यावरणीय विशेषज्ञ इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई और ढलानों का निर्माण भू-उपयोग को प्रभावित कर सकता है और भूस्खलन की संभावना बढ़ा सकता है।

पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार और सीमा सड़क संगठन (BRO) ने परियोजना में संशोधन किया है। प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की चौड़ाई को 12 मीटर से घटाकर 11 मीटर कर दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि इससे वृक्षों की कटाई कम होगी और पहाड़ी ढालों की स्थिरता बनी रहेगी। इसके साथ ही सड़क के किनारे रिटेनिंग वाल और जल निकासी के लिए क्यूलेट्स बनाए जाने की योजना है, ताकि भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का जोखिम न्यूनतम हो सके।

स्थानीय लोग और पर्यावरण संगठन इस कटाई योजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। हाल ही में हर्षिल में प्रदर्शनकारियों ने देवदार के वृक्षों को बचाने के लिए उन्हें “रक्षा सूत्र” बांधकर प्रतीकात्मक विरोध किया। उनका कहना है कि यह न केवल प्राकृतिक धरोहर है बल्कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जल संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

आपदाओं के लिए चेतावनी:

उत्तरकाशी जिले के धाराली क्षेत्र में हालिया फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने इस परियोजना को और भी संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई और ढलानों का निर्माण क्षेत्र को और अधिक आपदा-प्रवण बना सकता है। आलोचक यह भी मानते हैं कि परियोजना के कुछ हिस्सों में पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों में अनुमतियाँ बिना पूरी अध्ययन और जोखिम मूल्यांकन के दी गई हैं।

गंगोत्री हाईवे पर यह चौड़ीकरण चार धाम परियोजना के तहत हिमालयी तीर्थ स्थलों और सीमा क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का एक हिस्सा है। हालांकि, विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार और परियोजना अधिकारियों की संशोधित योजना वास्तव में पर्यावरणीय संरक्षण और लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त होगी।

यह मामला केवल एक सड़क निर्माण का नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी, देवदार वनों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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