देश की पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने अरावली पर्वत श्रृंखला में नई खदानों की स्थापना पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया। यह निर्देश गुजरात से राजस्थान और हरियाणा तक, तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) तक फैली अरावली श्रृंखला में लागू होगा। सरकार का यह कदम खनन से उत्पन्न हो रही पर्यावरणीय क्षति को रोकने और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अरावली पर्वत श्रृंखला दशकों से खनन गतिविधियों और अवैध उत्खनन का केंद्र रही है। पहले के नियमों के तहत कई खनन पट्टों को राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किया जाता रहा, जिसके कारण पर्यावरणीय नुकसान और भूजल संकट जैसी समस्याएँ लगातार बढ़ती रहीं। इसके विरोध में पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों ने बार-बार आवाज उठाई, लेकिन नियमों की ढील और निगरानी की कमी के चलते समस्या ज्यों की त्यों बनी रही।

केंद्र का नया आदेश:

केंद्र सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि अरावली में किसी भी प्रकार की नई खनन पट्टियाँ जारी नहीं की जाएँगी। मौजूदा खनन गतिविधियों को केवल उन शर्तों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप जारी रहने की अनुमति होगी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया गया है। इस आदेश का उद्देश्य है कि पर्यावरणीय निगरानी सख्त हो और अवैध उत्खनन पर रोक लगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से चल रही खदानें केवल तभी संचालित होंगी जब वे सभी पर्यावरणीय नियमों और सुप्रीम कोर्ट की निर्देशिकाओं का पालन करें। राज्य सरकारों को इन खानों की नियमित निगरानी और कड़े निरीक्षण के लिए जिम्मेदार बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली की सीमाओं और परिभाषा को मान्यता दी और निर्देश दिया कि नई खनन पट्टियाँ तब तक न दी जाएँ जब तक एक व्यापक ‘सतत खनन प्रबंधन योजना’ तैयार नहीं हो जाती। यह योजना अरावली के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करेगी और बताएगी कि किन क्षेत्रों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा और किन स्थानों पर सीमित मात्रा में अनुमत होगा।

केंद्र के इस आदेश पर विभिन्न पर्यावरणीय संगठनों ने संतोष व्यक्त किया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने नए 100 मीटर हिल-क्राइटेरिया के आधार पर परिभाषा को विवादास्पद बताया है, जिससे अरावली के कुछ पारंपरिक हिस्से अब सुरक्षा के दायरे से बाहर हो सकते हैं। राजनीतिक पार्टियों ने भी इस आदेश पर अपने-अपने दृष्टिकोण व्यक्त किए हैं, और इसे कुछ हद तक अपर्याप्त मानते हुए इसकी आलोचना की है।केंद्र सरकार ने यह निर्णय अरावली की पारिस्थितिकी, भूजल स्तर, जैव विविधता और मरुस्थलीकरण से सुरक्षा के लिए लिया है। खनन पर रोक से न केवल पर्यावरणीय संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय जल संसाधनों और वनस्पति-जीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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