राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) : देश में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। सरकार ने संसद को बताया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में 2024-25 में NCAP के तहत आने वाले 130 शहरों में से 103 शहरों में PM10 स्तर में कमी दर्ज की गई है। यह सफलता उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है जब देश तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण, नगरीकरण और वाहन दबाव से जूझ रहा है।

लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जानकारी दी कि इन 130 शहरों में से 22 शहर ऐसे हैं जहाँ PM10 स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे दर्ज हुआ, जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि 64 शहरों में PM10 स्तर में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई, जबकि 25 शहरों में यह कमी 40 प्रतिशत से भी अधिक रही।

दिल्ली सहित देश के बड़े महानगरों में भी हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में PM10 स्तर वर्ष 2017-18 में 241 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2024-25 में घटकर 203 हो गया। ग्रेटर मुंबई में यह स्तर 161 से 90 तक पहुंचा, कोलकाता में 147 से 92, अहमदाबाद में 164 से 103, हैदराबाद में 110 से 81 और बेंगलुरु में 92 से 68 µg/m3 के स्तर पर आया। यह सुधार साफ संकेत देता है कि शहरों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है।

NCAP जनवरी 2019 में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। हर शहर ने अपने-अपने स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर स्वच्छ वायु कार्ययोजना तैयार की है। इनमें सड़क की धूल, वाहन उत्सर्जन, कचरा जलाना, निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों तथा औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय शामिल हैं।

सरकार ने बताया कि वर्ष 2019-20 से अब तक इन शहरों को 13,415.43 करोड़ रुपये का प्रदर्शन-आधारित अनुदान जारी किया गया है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियाँ प्रभावी ढंग से लागू की जा सकें। NCAP के अंतर्गत 836 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन सक्रिय हैं, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) हर वर्ष शहरों का प्रदर्शन मूल्यांकित करता है।

देश में स्वच्छ हवा की दिशा में यह प्रगति न केवल सरकारी हस्तक्षेप की प्रभावशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि बड़े और प्रदूषण-प्रभावित शहर भी धीरे-धीरे सुधार की राह पर बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों से वायु गुणवत्ता और बेहतर होने की उम्मीद है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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