मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार साल 2026 में प्रशांत महासागर में दुर्लभ सुपर एल नीनो सक्रिय हो सकता है जिससे भारत में मानसून कमजोर पड़ने और रिकॉर्ड गर्मी की संभावना है।

Super El Nino forecast 2026 : प्रकृति एक बार फिर अपनी विनाशकारी शक्ति का परिचय देने को आतुर दिख रही है, क्योंकि प्रशांत महासागर के गहरे गर्भ में एक ऐसा मौसमी बदलाव आकार ले रहा है जो दुनिया भर के भूगोल और भविष्य को बदलकर रख सकता है। राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) के नवीनतम और चिंताजनक पूर्वानुमानों के अनुसार, वर्ष 2026 में 'सुपर अल नीनो' के आने की संभावना पहले से कहीं अधिक प्रबल हो गई है। वर्ष 1950 के बाद से अब तक ऐसा दुर्लभ और भीषण मौसमी चक्र केवल चार बार देखा गया है, लेकिन वर्तमान वैज्ञानिक डेटा संकेत दे रहे हैं कि यह पांचवां अवसर मानवता के इतिहास का सबसे गर्म और सबसे अप्रत्याशित वर्ष साबित हो सकता है। यह केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक वैश्विक चेतावनी है जो प्रशांत महासागर के तूफानों को नई ऊर्जा देगी और दुनिया के विभिन्न कोनों में मौसम के स्थापित पैमानों को ध्वस्त कर देगी।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाओं के कमजोर पड़ने से शुरू होती है। सामान्यतः ये हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल नीनो के प्रभाव में यह गर्म जल राशि वापस अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर बहने लगती है। इस बार का संकट इसलिए अधिक गहरा है क्योंकि जुलाई तक अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना अब 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि सर्दियों तक इसके जारी रहने की संभावना 96 प्रतिशत के साथ लगभग निश्चित मानी जा रही है। सबसे भयावह तथ्य यह है कि नवंबर 2026 और जनवरी 2027 के बीच इस घटना के 'सुपर अल नीनो' में बदलने की संभावना पिछले महीने के 25 प्रतिशत से बढ़कर अब 37 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ गया, तो यह आधुनिक काल का सबसे शक्तिशाली मौसमी प्रहार होगा।

इस मौसमी उथल-पुथल का प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है। राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने आगाह किया है कि 2026 अब तक के पांच सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की कगार पर है। एक 'सुपर अल नीनो' की स्थिति में कैरिबियन देशों में भीषण सूखा पड़ सकता है, जबकि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में मानसूनी वर्षा में भारी कमी आने की आशंका है, जिससे कृषि प्रधान अर्थव्यवस्थाओं पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में अत्यधिक ठंडी और नम सर्दियां पड़ सकती हैं, जो सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देंगी। हालांकि, NOAA की भौतिक वैज्ञानिक मिशेल एल'हेउरेक्स का तर्क है कि मजबूत अल नीनो हमेशा गंभीर प्रभावों की गारंटी नहीं देते, लेकिन वे विनाशकारी मौसम की संभावना को कई गुना बढ़ा जरूर देते हैं।

अंततः, 2026 का यह संभावित 'सुपर अल नीनो' मानवता के लिए एक कड़ा इम्तिहान साबित होने वाला है। यदि कंप्यूटर मॉडल के पूर्वानुमान सटीक बैठते हैं, तो दुनिया को 2015-16 से भी अधिक भीषण गर्मी और चक्रवातों का सामना करना पड़ेगा। यह घटनाक्रम न केवल जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि प्रकृति के संतुलन में मामूली सा विचलन किस प्रकार वैश्विक तबाही का कारण बन सकता है। आने वाले महीने यह तय करेंगे कि पृथ्वी इस 'सुपर' संकट का सामना करने के लिए कितनी तैयार है, क्योंकि इतिहास का सबसे गर्म वर्ष अब केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि एक डरावनी वास्तविकता बनता जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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