प्रकृति का बदला मिजाज ; नमक के खेतों में गूंजी प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट
थूथुकुडी में भारी बारिश ने किया चमत्कार! नमक के खेत बने प्रवासी पक्षियों का बसेरा। यूरोप और एशिया से हजारों मील उड़कर आए 'रोजी स्टार्लिंग्स' और अन्य जलचर पक्षियों ने थूथुकुडी के सॉल्ट पैन्स को बनाया अपना घर। भारी जलजमाव और भोजन की प्रचुरता ने इलाके को 'बर्ड पैराडाइज' में बदल दिया है। विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Thoothukudi Bird Migration : तमिलनाडु का बंदरगाह शहर थूथुकुडी इन दिनों एक ऐसी दुर्लभ और विस्मयकारी पारिस्थितिक घटना का गवाह बन रहा है, जिसने पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। क्षेत्र में हुई असामान्य रूप से भारी बारिश ने यहाँ के पारंपरिक नमक के खेतों (Salt Pans) का भूगोल ही बदल दिया है। 'सफेद सोने' के लिए मशहूर ये मैदान अब अस्थायी वेटलैंड्स (नम भूमि) में तब्दील हो चुके हैं, जहाँ हजारों मील दूर से आए प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा डाल लिया है।
नमक की क्यारियों में जीवन का संचार :
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सामान्यतः केवल नमक उत्पादन के लिए उपयोग होने वाले इन शुष्क मैदानों में भारी जलजमाव ने एक नया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर दिया है। बारिश के पानी के कारण इन खेतों में छोटी मछलियाँ, लार्वा और कीड़ों की भारी उपलब्धता हो गई है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श 'बुफे' का काम कर रही है।
इस घटना की गंभीरता को समझाते हुए वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "नमक के खेतों में जलचर पक्षियों का इतनी बड़ी तादाद में इकट्ठा होना एक दुर्लभ संकेत है। यह प्रकृति की अपनी प्रतिक्रिया है, जहाँ भोजन की प्रचुरता ने पक्षियों को यहाँ रुकने पर मजबूर कर दिया है।"
यूरेशियाई मेहमानों का 'रोजी स्टार्लिंग्स' शो :
इस साल का मुख्य आकर्षण 'रोजी स्टार्लिंग्स' (Rosy Starlings) का आगमन है। उत्तर-पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप के प्रजनन क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आए इन पक्षियों के विशाल झुंड थूथुकुडी के आसमान में अद्भुत कलाबाजियां करते देखे जा रहे हैं।
- प्रवास काल: ये पक्षी अक्टूबर-नवंबर में दक्षिण भारत पहुँचते हैं और मार्च-अप्रैल तक यहीं प्रवास करते हैं।
- अनुकूल परिस्थितियाँ: पर्यावरण विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आर. मीनाक्षी के अनुसार, इनकी मौजूदगी क्षेत्र में सुरक्षित प्रवास और भरपूर भोजन का स्पष्ट प्रमाण है।
- पारिस्थितिक लाभ: वन्यजीव जीवविज्ञानी एस. अरुलराज का कहना है कि ये पक्षी सर्वाहारी होते हैं और खेतों के कीड़ों को खाकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल का विषय :
थूथुकुडी के उपनगरीय इलाकों में रहने वाले लोग पहली बार अपने घर के पास इतना समृद्ध वन्यजीव देख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि क्षेत्र में अगले कुछ हफ्तों तक नमी बनी रहती है, तो यह स्थान स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रकार के पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण अस्थायी शरणस्थली बना रहेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
