हिमालय की गोद में बसा प्राकृतिक सौंदर्य इस बार अप्रत्याशित बदलाव का सामना कर रहा है। 2025 में हिमालय क्षेत्र में बर्फ की उपस्थिति में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले 23 वर्षों का सबसे न्यूनतम स्तर है। अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय शोध केंद्र (ICIMOD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हिंदु कुश‑हिमालय (HKH) क्षेत्र में बर्फ की स्थायित्व दर 23.6% सामान्य स्तर से कम रही। “बर्फ की स्थायित्व दर” से तात्पर्य है कि बर्फ कितने समय तक जमीन पर बनी रहती है।

मुख्य नदियों जैसे गंगा और ब्रह्मपुत्र के बेसिन में बर्फ की स्थायित्व दर विशेष रूप से कम देखी गई। इसका अर्थ है कि यहां बर्फ गिरने के बावजूद वह तेजी से पिघल रही है या वाष्प बनकर उड़ रही है। यह स्थिति केवल दृश्यात्मक परिवर्तन नहीं, बल्कि जल संसाधनों और पर्यावरणीय संतुलन पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालय में बर्फ की कमी के पीछे कई कारक हैं। सबसे महत्वपूर्ण कारण जलवायु परिवर्तन और तापमान में वृद्धि है। हिमालय क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे न केवल बर्फ जल्दी पिघल रही है, बल्कि निम्न ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ का जमाव भी प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा, “स्नो‑लाइन” यानी वह ऊँचाई जिस पर बर्फ स्थायी रूप से रहती है, में वृद्धि हो रही है। इससे हिमालय के मध्यवर्ती क्षेत्रों में अब पहले जैसी बर्फ जमा नहीं हो पा रही। वर्षा और मौसमी पैटर्न में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कमजोर या कम होने वाले शीतकालीन तूफान बर्फ गिरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

हिमालय की बर्फ केवल दृश्य सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एशिया की प्रमुख नदियों के लिए जीवनदायिनी जल आपूर्ति का स्रोत भी है। बर्फ में कमी का मतलब है ग्लेशियर और नदियों के पानी का घटता प्रवाह, जो भारत, नेपाल, भूटान और चीन में करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा पर असर डाल सकता है।

लंबे समय में यह ग्लेशियरों के पतन को भी तेज कर सकता है, जिससे भविष्य में पानी की आपूर्ति पर और अधिक दबाव पड़ेगा। कृषि, जलाशयों और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो बड़े पैमाने पर जल संकट और सूखे की आशंका बढ़ सकती है।

इस वर्ष हिमालय में बर्फ की कमी ने प्रकृति और मानव जीवन दोनों के लिए गंभीर संकेत भेजे हैं। यह न केवल पर्यावरणीय परिवर्तन का उदाहरण है, बल्कि यह चेतावनी भी है कि हमें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए तत्परता और स्थायी समाधान अपनाने होंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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