उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धाराली क्षेत्र में गंगोत्री हाईवे के विस्तार को लेकर हाल ही में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। चार धाम परियोजना के तहत इस हाईवे को ऑल-वेदर रोड में परिवर्तित करने की योजना के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों के चलते स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने एफ्फीजी जलाकर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिससे इलाके में सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ गईं।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, विरोध के चलते हाईवे पर वाहनों की पार्किंग और असामयिक भीड़भाड़ ने यातायात को प्रभावित किया है। हाईवे पर जाम की स्थिति बनी हुई है, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण से न केवल यात्रा की गति धीमी हुई है, बल्कि तीर्थयात्रियों के लिए भी कठिनाइयां बढ़ गई हैं।

पिछले कुछ महीनों में गंगोत्री हाईवे पर प्राकृतिक और मानव-निर्मित व्यवधानों की श्रृंखला रही है। भारी बारिश और भूस्खलनों के कारण कई बार हाईवे बंद हुआ, जिससे स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया। धारसु पुराना थाना और सोनागाड़ जैसी जगहों पर भूस्खलन के कारण सड़क पर मलबा जमा हो गया था, जिसे हटाने के लिए प्रशासन और ब्रॉड रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीमों ने काम किया।

इसके अलावा, मौसम की गंभीरता के कारण गंगोत्री क्षेत्र में आपातकालीन सावधानियों को बढ़ाया गया। राज्य सरकार ने हाईवे की सुरक्षा और यातायात सुचारू करने के लिए विशेष निगरानी रखने और मलबा हटाने के काम को तेज करने के निर्देश जारी किए। चार धाम परियोजना के तहत हाईवे के विस्तार और सुरक्षा में कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। धाराली हादसे के बाद केंद्रीय स्तर पर इस मार्ग की सुरक्षा और डिजाइन की समीक्षा की गई।

हाईवे की चौड़ाई को 12 मीटर से घटाकर 11 मीटर किया गया, ताकि पहाड़ी कटाव और भूस्खलन की जोखिम कम हो। पर्यावरणीय चिंता के तहत क्षेत्र में 6,000 से अधिक देवदार के पेड़ों के कटाव की योजना ने स्थानीय और राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध को जन्म दिया। इसके अलावा, भागीरथी नदी में लंबे समय से ड्रेजिंग पर रोक के कारण नदी में तलछट की मात्रा बढ़ गई है, जो बाढ़ और कटाव की संभावना को बढ़ाता है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी सुरक्षा कार्यों और स्लोप प्रोटेक्शन को तेज करने के आदेश दिए हैं। इससे हाईवे को प्राकृतिक आपदाओं और भूस्खलन से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

गंगोत्री हाईवे न केवल स्थानीय लोगों का जीवनरेखा है, बल्कि हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। यात्रियों को मौसम और प्राकृतिक घटनाओं के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन और यात्रा मार्गदर्शन सेवाएं जैसे कि गूगल Maps, यात्रियों को वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

इस पूरी स्थिति ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। धाराली का मामला यह याद दिलाता है कि पर्यावरणीय सुरक्षा और पहाड़ी इलाकों की संरचना को ध्यान में रखे बिना किए गए विकास कार्य कई बार गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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