International Cheetah Day : अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्यजीव संरक्षण के समर्थकों, शोधकर्ताओं और दुनिया भर के प्रकृति-प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत आज कई चीतों का घर बन चुका है और उनमें से बड़ी संख्या यहीं भारतीय धरती पर जन्मी है। यह केवल एक पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि खो चुकी जैव-विविधता को पुनर्जीवित करने की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम भी है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में याद किया कि तीन वर्ष पहले भारत ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य न केवल इस अद्भुत प्रजाति की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, बल्कि उस इकोसिस्टम को फिर से जीवित करना भी था, जिसमें चीता स्वाभाविक रूप से पनप सके। उन्होंने लिखा कि भारत की यह प्रगति करोड़ों लोगों के सामूहिक सहयोग और उन ‘चीता मित्रों’ की समर्पित मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने संरक्षण के इस कठिन मार्ग पर निरंतर योगदान दिया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर सेंचुरी में चीतों का सफलतापूर्वक बढ़ना इस अभियान की सफलता का जीवंत प्रमाण है और ‘चीता टूरिज़्म’ के बढ़ते आकर्षण ने इस प्रयास को और गति दी है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विश्व भर के वन्यजीव प्रेमियों को भारत आने और चीतों की प्राकृतिक भव्यता को नज़दीक से देखने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर रहने का भाव भारत की प्राचीन सभ्यता का अंग रहा है और आज वही भावना संरक्षण प्रयासों में दिखती है।

इधर मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भी आज चीता संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘वीरा’ और उसके दस महीने के दो शावकों को आज खुले जंगल में स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इन चीतों को जंगल में छोड़ेंगे। वीरा वर्ष 2023 में अन्य 11 चीतों के साथ भारत लाई गई थी और आज उसके शावकों के मुक्त विचरण से परियोजना को नए आयाम मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री यादव कूनो उद्यान का वार्षिक कैलेंडर और वन्यजीव प्रबंधन नियमावली भी जारी करेंगे। साथ ही नवनिर्मित स्मारिका विक्रय केंद्र का उद्घाटन भी होगा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की विशेष पहल से शुरू हुई चीता परियोजना अब फल-फूल रही है और प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। यह परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाता है, जिसने भारत को वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर और भी दृढ़ता से स्थापित किया है।

अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस का यह अवसर न केवल एक उत्सव है, बल्कि भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है जो वन्यजीवों की सुरक्षा और प्रकृति के संतुलन को पुनर्स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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