आज जब भी बॉलीवुड में कंटेंट, रियल इमोशन और मॉडर्न स्टोरीटेलिंग की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Zoya Akhtar का। “गली बॉय”, “जिंदगी ना मिलेगी दोबारा” और “दिल धड़कने दो” जैसी फिल्मों ने उन्हें सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं, बल्कि नए दौर की सिनेमाई आवाज बना दिया है। उनकी फिल्मों की खासियत यही है कि उनमें ग्लैमर के पीछे छुपी असली जिंदगी दिखाई देती है। चाहे मुंबई की रैप कल्चर हो, अमीर परिवारों की टूटती रिश्तेदारी हो या फिर दोस्ती और खुद को खोजने का सफर, जोया हर कहानी को इतनी ईमानदारी से दिखाती हैं कि दर्शक उससे जुड़ जाते हैं। यही वजह है कि आज सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह उनकी चर्चा होती रहती है।

14 अक्टूबर 1972 को जन्मीं जोया ऐसे परिवार से आती हैं जहां लेखन और सिनेमा पहले से ही जिंदगी का हिस्सा था। उनके पिता मशहूर गीतकार और लेखक Javed Akhtar हैं, जबकि मां Honey Irani जानी-मानी स्क्रीनराइटर रहीं। अभिनेत्री Shabana Azmi उनकी सौतेली मां हैं और Farhan Akhtar उनके भाई। लेकिन जोया ने सिर्फ परिवार के नाम पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से फिल्ममेकिंग की पढ़ाई की और फिर मीरा नायर, टोनी गर्बर और देव बेनेगल जैसे निर्देशकों के साथ काम करके अपने हुनर को तराशा। शुरुआती दिनों में उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी खूब मेहनत की।

साल 2009 में आई “लक बाय चांस” उनके डायरेक्शन का पहला बड़ा कदम थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भले बहुत बड़ी हिट नहीं बनी, लेकिन इंडस्ट्री के अंदर के संघर्ष को जिस तरीके से उन्होंने दिखाया, उसने आलोचकों को उनका फैन बना दिया। इसी फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद 2011 में “जिंदगी ना मिलेगी दोबारा” आई और जोया रातोंरात बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्ममेकर बन गईं। दोस्ती, जिंदगी और खुद को समझने की इस कहानी ने युवाओं के बीच अलग ही वाइब पैदा कर दी। फिल्म ने दुनियाभर में जबरदस्त कमाई की और जोया को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलाया।

जोया की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उन्होंने हर बार अलग दुनिया दिखाई। “तलाश” में साइकोलॉजिकल थ्रिलर, “दिल धड़कने दो” में अमीर परिवारों की नकली खुशियां और “गली बॉय” में मुंबई की गलियों से निकली रैप संस्कृति को उन्होंने बड़े पर्दे पर इस तरह उतारा कि लोग दंग रह गए। Gully Boy सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि पूरे देश में हिप-हॉप कल्चर का विस्फोट थी। रणवीर सिंह और आलिया भट्ट स्टारर इस फिल्म ने 13 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतकर रिकॉर्ड बना दिया। इसी फिल्म ने जोया को दूसरी बार बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया और वह यह सम्मान दो बार जीतने वाली पहली महिला निर्देशक बन गईं।

फिल्मों के अलावा ओटीटी की दुनिया में भी जोया का दबदबा कम नहीं है। Made in Heaven ने भारतीय शादियों के पीछे छुपे ड्रामे, क्लास डिवाइड और रिश्तों की सच्चाई को बेहद बोल्ड अंदाज में दिखाया। वहीं Dahaad ने क्राइम थ्रिलर जॉनर में भी उनकी पकड़ साबित की। उनकी प्रोडक्शन कंपनी Tiger Baby Films, जिसे उन्होंने रीमा कागती के साथ शुरू किया, आज नए और एक्सपेरिमेंटल कंटेंट का बड़ा नाम बन चुकी है। हालांकि “द आर्चीज” को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला, लेकिन जोया लगातार नए चेहरों और नई कहानियों पर दांव लगाने से पीछे नहीं हटतीं।

आज जोया अख्तर सिर्फ एक फिल्ममेकर नहीं, बल्कि उस बदलते बॉलीवुड का चेहरा हैं जहां स्टारडम से ज्यादा कहानी मायने रखती है। उनकी फिल्मों में रियल लाइफ की खुशियां, दर्द, रिश्ते और सपने इतने नेचुरल तरीके से नजर आते हैं कि हर जेनरेशन खुद को उनमें देख पाती है। यही कारण है कि जब भी हिंदी सिनेमा में मॉडर्न और स्मार्ट स्टोरीटेलिंग की बात होगी, जोया अख्तर का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा।

Pratahkal Newsroom

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