भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में अपनी अदाओं और अभिनय से एक अलग पहचान बनाने वाली ज़ीनत अमान का सफर किसी रोमांचक पटकथा से कम नहीं रहा है। एक ऐसी अभिनेत्री, जिन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक में अपने साहसी और लीक से हटकर किरदारों से बॉलीवुड की नायिका की परिभाषा ही बदल दी थी, आज सोशल मीडिया पर अपनी परिपक्वता और विचारों के चलते नई पीढ़ी की चहेती बनी हुई हैं। हालांकि, उनका यह चमकदार सफर व्यक्तिगत जीवन के उन गहरे संघर्षों और पीड़ाओं से होकर गुजरा है, जिन्होंने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया था।

ज़ीनत अमान का प्रारंभिक जीवन पारिवारिक अस्थिरता के बीच बीता। कम उम्र में माता-पिता का अलग होना और तेरह वर्ष की आयु में पिता को खो देने जैसी त्रासदियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अभिनय की दुनिया में अपना नाम बनाया। 1970 में 'द इविल विदिन' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली ज़ीनत को असली पहचान 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) से मिली। इस फिल्म की अपार सफलता ने उन्हें सुपरस्टार की कतार में खड़ा कर दिया, जिसके बाद उन्होंने देवानंद, धर्मेंद्र, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया।

हालांकि, पर्दे पर उनकी सफलता के समानांतर उनका निजी जीवन विवादों और हिंसा के साये में रहा। 1978 में अभिनेता संजय खान के साथ उनका विवाह उनके जीवन का सबसे चर्चित और दुखद अध्याय साबित हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक होटल में फिल्म की रीशूटिंग के सिलसिले में हुई मुलाकात के दौरान उनके और संजय खान के बीच बहस ने हिंसक मोड़ ले लिया। बताया जाता है कि इस दौरान हुई मारपीट में ज़ीनत को गंभीर चोटें आईं, जिसमें उनकी एक आंख को स्थायी रूप से क्षति पहुंची। यह घटना भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे काले पन्नों में से एक मानी जाती है, जिसने देश को हिलाकर रख दिया था।

संजय खान से अलग होने के कुछ वर्षों बाद, ज़ीनत ने 1985 में अभिनेता मजहर खान के साथ नया जीवन शुरू करने का प्रयास किया। लेकिन यह विवाह भी उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। सिमी गरेवाल के चैट शो 'रेंडेज़वस' में उन्होंने खुलासा किया था कि शादी के पहले साल में ही उन्हें एहसास हो गया था कि उन्होंने गलत निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि मजहर खान कभी नहीं चाहते थे कि एक कलाकार और व्यक्ति के रूप में उनका विकास हो।

ज़ीनत अमान के जीवन में एक अत्यंत कठिन दौर तब आया जब 1993 में मजहर खान गंभीर अग्न्याशय (pancreatic) बीमारी से ग्रस्त हो गए। उस चुनौतीपूर्ण समय में, ज़ीनत ने एक समर्पित जीवनसाथी की भूमिका निभाई और चार वर्षों तक उनके इलाज के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने उन्हें विदेशों में भी उपचार दिलाया, लेकिन 1998 में गुर्दे की विफलता के कारण मजहर खान का निधन हो गया। पति को खोने के बाद ज़ीनत ने पूरी निष्ठा के साथ अपने दोनों बेटों, अज़ान और ज़हान खान की परवरिश की। आज, वे एक सशक्त एकल मां के रूप में अपने बेटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं और सिनेमा की दुनिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी नई पारी के जरिए दर्शकों के बीच निरंतर प्रासंगिक बनी हुई हैं।

Pratahkal Newsroom

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